सवाल? क्या रूस जैसे प्रतिबंधों का सामना कर पाएगी भारतीय भुगतान व्यवस्था?

रुपे कार्ड का वीजा या मास्टरकार्ड के मुकाबले लेन-देन में अधिक इस्तेमाल होता है। एटीएम नेटवर्क भी सुरक्षित हैं क्योंकि यह वैश्विक नेटवर्क पर निर्भर नहीं हैं।

सवाल? क्या रूस जैसे प्रतिबंधों का सामना कर पाएगी भारतीय भुगतान व्यवस्था?

यूक्रेन पर हमला करने की वजह से लगभग पूरी दुनिया से प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस में अब वीजा, मास्टरकार्ड और पेपाल जैसी अंतरराष्ट्रीय भुगतान सेवाओं ने भी अपनी सेवाएं बंद करने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में सवाल उठा है कि क्या भारतीय वित्त व्यवस्था ऐसे प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था को सीमित प्रतिस्पर्धा से बचाने में कुछ प्रयासों का परिणाम देखने को मिला है लेकिन भारत चीन जितना सुरक्षित नहीं है।

भुगतान की दुनिया में भारत ने एनपीसीआई के तहत रुपे डेबिट कार्ड जारी करने के बाद से उल्लेखनीय क्षमताएं हासिल की हैं।

ऐसा भी नहीं है कि भारत पर कभी कोई प्रतिबंध ही नहीं लगा है। साल 1998 के परमाणु परीक्षणों को लेकर देश को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा ईरान के साथ कच्चे तेल का कारोबार करने वाली भारतीय तेल कंपनियों को जोखिम उठाना पड़ा। बीमा कंपनियों को दूसरे क्रम के असर का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्हें ईरान के तेल को रिफाइन करने वाली कंपनियों को कवर करने के लिए दोबारा बीमा का जरूरी सहयोग नहीं मिल सका।