भाई ने कहा था, ऑस्ट्रेलिया के इस शहर में न आओ, वक्त बदला, अब वहां चुनाव लड़ रहे हैं रजत चोपड़ा

रजत चोपड़ा आगामी होबार्ट नगर परिषद चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। उनका कहना है कि मैं होबार्ट में चुनाव लड़ने वाला पहला भारतीय मूल का नागरिक बनूंगा। हमें सहभागी लोकतंत्र की संस्कृति विकसित करनी चाहिए।

भाई ने कहा था, ऑस्ट्रेलिया के इस शहर में न आओ, वक्त बदला, अब वहां चुनाव लड़ रहे हैं रजत चोपड़ा

भारत के नोएडा में रहने वाले रजत चोपड़ा ने जब ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट जाने का फैसला किया तो परिवार में हर कोई हैरान था। मेलबर्न में रजत के चचेरे भाई रहते हैं। जब रजत ने उन्हें बताया कि वह 10 दिनों में होबार्ट जा रहे हैं, तो उन्हें सलाह दी गई कि उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए, क्योंकि वहां कोई काम नहीं है। किसी को भी वहां कुछ नहीं मिल रहा है। आज रजत चोपड़ा आगामी होबार्ट नगर परिषद चुनावों में भारतीय मूल के पहले उम्मीदवार बन गए हैं।

हालांकि रजत के चचेरे भाई ने कोई गलत सलाह नहीं दी थी। रजत कहते हैं कि 2013 में जब हम भारत से यहां आए थे, तो शायद ही कोई भारतीय था। इसलिए, हमें भारतीय किराना स्टोर और उस तरह का सामान नहीं मिला। पत्नी भी साथ में थी। वह होबार्ट छोड़ना चाहती थी। लेकिन आज नौ साल बाद 2022 में होबार्ट पूरी तरह से बदल गया है। तस्मानिया की बहुसांस्कृतिक परिषद के पूर्व अंतरिम सीईओ रजत चोपड़ा का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में होबार्ट में बदलाव को आप महसूस कर सकते हैं।

तस्मानिया की बहु सांस्कृतिक परिषद के पूर्व अंतरिम सीईओ रजत चोपड़ा का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में होबार्ट में बदलाव को आप महसूस कर सकते हैं।

रजत का कहना है जब मैं यहां आया तो मैंने सोचा कि एक क्रिकेट प्रतियोगिता शुरू करनी चाहिए। इससे मुझे अपने लोगों को खोजने और उनसे दोस्ती करने में मदद मिलेगी, क्योंकि मैं किसी को नहीं जानता था। उस समय हमारे पास दो टीमें थीं। मैं इस प्रतियोगिता को लगभग छह साल से चला रहा हूं। पिछले साल हमारे पास 13 क्रिकेट टीमें थीं। फिर दो नई प्रतियोगिताएं शुरू हुईं और उनमें 10 से 15 टीमें थीं। उनका कहना है कि भारतीय प्रवासियों की बढ़ती संख्या ने यह एहसास कराया है कि समाज के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक प्रतिनिधित्व की जरूरत है।

उनका कहना है कि सरकार के हर स्तर पर हमारी बात होनी चाहिए. हमें सक्रिय होना चाहिए और उस मेज पर एक सीट ढूंढनी चाहिए जहां निर्णय किए जाते हैं। और वे निर्णय हमारी आजीविका को प्रभावित करते हैं। रजत के मुताबिक होबार्ट में 6,000 से अधिक छोटे व्यवसाय हैं। सभी छोटे व्यवसाय संचालकों में से लगभग एक चौथाई का जन्म विदेशों में हुआ है। होबार्ट में करीब 6000 अंतरराष्ट्रीय छात्र रहते हैं। प्रवासियों राज्य की अर्थव्यवस्था में करीब 600 मिलियन डॉलर का योगदान दिया है। बहुत सारे नए प्रवासी हैं जो अब होबार्ट में रहते हैं और काम करते हैं।

रजत चोपड़ा आगामी होबार्ट नगर परिषद चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। उनका कहना है कि मैं होबार्ट में चुनाव लड़ने वाला पहला भारतीय मूल का नागरिक बनूंगा। हमें सहभागी लोकतंत्र की संस्कृति विकसित करनी चाहिए। जहां हम शहर के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में समान रूप से भाग ले सकें। समानता किसी से छीनने की वस्तु नहीं है। यह संतुलन, समान प्रतिनिधित्व और विचार और कार्य की समृद्धि के बारे में है। कम प्रतिनिधित्व के परिणामस्वरूप निर्णय लेने, कौशल और अंततः लोकतंत्र की कमी हो सकती है।