ऑस्ट्रेलिया के निचले सदन में सांसद बनीं जेनेटा, क्या है उनका इंडिया कनेक्शन और प्राथमिकताएं

मैस्करेन्हस ने चुनावी राजनीति में पहला प्रयास साल 2019 में किया था। संघीय चुनाव से पहले लेबर पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर स्वान से चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार में मेरी शीर्ष प्राथमिकताओं में जलवायु संकट और भ्रष्टाचार की चुनौतियों से निपटना होगा।

ऑस्ट्रेलिया के निचले सदन में सांसद बनीं जेनेटा, क्या है उनका इंडिया कनेक्शन और प्राथमिकताएं

जेनेटा मैस्करेन्हस ऑस्ट्रेलिया के निचले सदन के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय मूल की पहली नेता बन गई हैं। पेशे से इंजीनियर मैस्करेन्हस का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था लेकिन उनकी जड़ें भारत के तटीय राज्य गोवा से जुड़ी हुई हैं।

दो बच्चों की मां और लेबर पार्टी की नेता मैस्करेन्हस को स्वान डिविजन से सांसद चुना गया है।

दो बच्चों की मां और लेबर पार्टी की नेता मैस्करेन्हस को स्वान डिविजन से सांसद चुना गया है। उन्होंने अपने लिबरल प्रतिद्वंद्वी क्रिस्टी मैक्स्वीनी को मात दी और 101 साल के इतिहास में स्वान सीट पर जीत हासिल करने वाली पहली महिला बन गईं। मैस्करेन्हस ने अपने विजय संबोधन में कहा कि यह बहुत रोमांचक क्षण है। मुझे पता है कि स्वान के लोगों ने मुझे प्रतिनिधि के तौर पर चयनित पहली महिला बनाया है। हम बेहतर भविष्य में विश्वास रखते हैं और इस दिशा में मिलकर काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार में मेरी शीर्ष प्राथमिकताओं में जलवायु संकट और भ्रष्टाचार की चुनौतियों से निपटना होगा। मैस्करेन्हस के माता-पिता मई 1979 में ऑस्ट्रेलिया आए थे। यहां पर उनके पिता कंबाल्डा नामक कस्बे में काम करते थे। आठ साल से मैस्करेन्हस अपने पति और दो बच्चों के साथ ईस्ट विक्टोरिया पार्क इलाके में रह रही हैं। उनके दादा-दादी और माता-पिता का जन्म गोवा में हुआ था जो उस समय पुर्तगाली कॉलोनी था। ऐसे में जन्म से उनकी नागरिकता पुर्तगाली थी।

मैस्करेन्हस ने चुनावी राजनीति में पहला प्रयास साल 2019 में किया था। संघीय चुनाव से पहले लेबर पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर स्वान से चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन साथी नेता के समर्थन में उन्होंने आवेदन वापस ले लिया था। 18 साल की आयु में मैस्करेन्हस ने पर्थ की कर्टिन यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था। यहां उन्होंने विज्ञान और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियर के तौर पर अपने 15 साल के करियर में उन्होंने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और विक्टोरिया समेत कई जगह काम किया है।