वाशिंगटन में कश्मीरी पंडितों ने US से लेकर भारत सरकार से की यह मांग

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि उनकी संस्कृति व इतिहास विलुप्त होने को है। कश्मीर के इतिहास में 22 अक्टूबर का महत्व है। इस दिन 1947 में पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन गुलमर्ग' के हिस्से के रूप में जम्मू और कश्मीर पर आक्रमण किया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र को इस आधार पर जीतना था कि इलाका मुस्लिम बहुल हैं।

वाशिंगटन में कश्मीरी पंडितों ने US से लेकर भारत सरकार से की यह मांग

अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में बसे कश्मीरी पंडित समुदाय ने कश्मीरी पंडितों के इतिहास और संस्कृति के बारे में जागरूकता फैलाने को लेकर दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम वाशिंगटन स्मारक मैदान में किया गया।

कार्यक्रम में मौजूद कश्मीरी पंडितों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की संस्कृति और उनका इतिहास विलुप्त होने की कगार पर है। 

कार्यक्रम में मौजूद कश्मीरी पंडितों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की संस्कृति और उनका इतिहास विलुप्त होने की कगार पर है। कश्मीर के इतिहास में 22 अक्टूबर का ऐतिहासिक महत्व है। इस दिन 1947 में पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन गुलमर्ग' के हिस्से के रूप में भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर पर आक्रमण किया था। इस हमले का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर को इस आधार पर जीतना था कि इस क्षेत्र में मुस्लिम बहुमत में हैं। खैबर पख्तूनख्वा से पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी कश्मीर के बारामूला शहर पहुंचे और उन्होंने लूटपाट और हत्याएं की। ऐसा अनुमान है कि इस हमलें में 9000 कश्मीरी मारे गए जिनमें ज्यादातर हिंदू और सिख थे। यहां तक कि एक स्थानीय कान्वेंट में ईसाई भिक्षुणियों को भी नहीं बख्शा गया था।

इस हमले के बाद से ही पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ करता है और भारत के साथ छद्म युद्ध जारी रखे हुए है। कार्यक्रम में मौजूद कश्मीरी पंडित समुदाय ने कश्मीर में हो रही हत्याओं पर खामोशी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया आज खामोश क्यों है? मानवाधिकार संगठन कश्मीरी पंडितों के बारे में चुप क्यों हैं? पश्चिमी देशों के सांसद और मीडिया कश्मीरी पंडितों की कहानी, उनकी दुर्दशा को सामने क्यों नहीं लाता? कश्मीरी पंडित अपने अस्तित्व से क्यों वंचित हैं? बावजूद इसके की अकेले साल 2021 में 30 कश्मीरियों की हत्या कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वह अपनी कहानियां सुनाने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं। वे न्याय का इंतजार कर रहे हैं और अपने घर यानी कश्मीर में अपने पुश्तेनी मकानों में सम्मा​नजन​क वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

वाशिंगटन डीसी में रहने वाली कश्मीरी पंडित कार्यकर्ता डॉ. शकुन मलिक ने कहा कि हमारी मांग है कि कश्मीर घाटी में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी द्वारा अल्पसंख्यकों की हत्याओं को रोका जाए। कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और अत्याचार पर संयुक्त राष्ट्र संघ नजर ध्यान दे। साथ ही भारत सरकार कश्मीर घाटी के स्थानीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जो अभी तक सरकार का मात्र एक लक्ष्य बना हुआ है।