अफगान संकट पर भारत का साथ लेता अमेरिका तो नजारा और होता: लैंसिया

रिपब्लिकन ने आगे कहा कि अगर गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का हिस्सा होता तो अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को पाकिस्तान जैसे अविश्वसनीय और दोहरे खेल खेलने वाले देश पर निर्भर रहने के बजाय भारत से सीधे आपूर्ति मिल सकती थी।

अफगान संकट पर भारत का साथ लेता अमेरिका तो नजारा और होता: लैंसिया

रोड आइलैंड से अमेरिकी कांग्रेस के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बॉब लैंसिया ने कहा है कि अफगानिस्तान से संयुक्त राज्य अमेरिका के असफल निकास के पीछे भारत को भागीदार न बनाने से बहुत कुछ लेना-देना था। लैंसिया ने कहा कि अफगानिस्तान से अपनी वापसी के दौरान अमेरिका ने अगर भारत के साथ भागीदारी की होती तो आज चीजें कुछ अलग होतीं। अगर बलूचिस्तान स्वतंत्र होता और गिलगित-बाल्टिस्तान भारत में होता तो अमेरिका को पाकिस्तान जैसे अविश्वसनीय और दोहरे खेल खेलने वाले देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

बता दें कि बॉब लैंसिया रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य हैं और रोड आइलैंड हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के पूर्व सदस्य हैं। वह इस साल नवंबर में रोड आइलैंड से होने वाले यूनाइटेड स्टेट्स हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। बॉब लैंसिया ने ट्विटर का सहारा लिया और कहा कि अगर बलूचिस्तान एक स्वतंत्र देश होता तो अमेरिका इसका इस्तेमाल पाकिस्तान पर निर्भर रहने के बजाय अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की आपूर्ति के लिए कर सकता था।

लैंसिया ने लिखा कि जैसा कि कर्नल राल्फ पीटर्स ने अपनी कांग्रेस की गवाही में बताया कि एक स्वतंत्र बलूचिस्तान पाकिस्तान पर भरोसा किए बिना हमारे सैनिकों की आपूर्ति के लिए अमेरिका को अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच प्रदान करता जो स्पष्ट रूप से दोहरा खेल खेल रहा था। यह प्रमाणित किया गया है कि अफगानिस्तान के लिए अमेरिका द्वारा आपूर्ति किए गए हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान के आंतरिक खिलाड़ियों द्वारा कश्मीर में अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा सकता है।

बॉब लैंसिया ने कहा कि पाकिस्तान की गहरी जेब भरने के बजाय एक स्वतंत्र बलूच प्रांत अमेरिका को लंबे समय में अफगानिस्तान को पुनः प्राप्त करने में मदद करता। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने स्थिति का विश्लेषण करने में भारत की मदद नहीं ली। रिपब्लिकन ने आगे कहा कि अगर गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का हिस्सा होता तो यूएस टॉप्स को भारत से भी आपूर्ति प्रदान की जा सकती थी। अगर गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र भारत के नियंत्रण में होता तो अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को पाकिस्तान जैसे अविश्वसनीय और दोहरे खेल खेलने वाले देश पर निर्भर रहने के बजाय भारत से सीधे आपूर्ति मिल सकती थी।

उन्होंने लिखा कि भारतीय नियंत्रित गिलगित-बाल्टिस्तान अमेरिका के नंबर एक प्रतिद्वंद्वी चीन और चीन के बेल्ट एंड रोड पहल के लिए एक बड़ा झटका होगा। चीन को अरब सागर पर बंदरगाहों तक सीधे पहुंच से वंचित किया जा सकेगा। गिलगित बाल्टिस्तान क्षेत्र जिस पर वर्तमान में पाकिस्तानी सेना का कब्जा है जो विस्तारवादी सपनों को देखने वाले साम्यवादी साम्राज्य चीन को सीधे जोड़ता है।

लैंसिया के अनुसार यदि यह क्षेत्र भारत का होता तो यह सीधे पाकिस्तान को जोड़ने वाली चीन की बेल्ट-एंड-रोड परियोजना को अवरुद्ध कर देता। इसके अलावा इससे अमेरिका को सीधे भारत में अपनी सैन्य आपूर्ति प्राप्त करने में मदद मिलती जिसका उपयोग अफगान मिशन के लिए किया जाना था।

बता दें कि मार्च 2020 में अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी शुरू करने के तुरंत बाद इस्लामिक समूह तालिबान ने पिछले साल 15 अगस्त तक काबुल पर कब्जा कर लिया था। तालिबान ने अफगानिस्तान के अधिकांश प्रांतों पर कब्जा कर लिया है और वहां की आवाम पर अपनी सरकार स्थापित कर ली है। मालूम हो कि अल कायदा द्वारा 9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था। अफगानिस्तान पर यह युद्ध 20 साल तक चला और आखिर में अमेरिका ने तालिबान के इस्लामी शासन से पहले देश को छोड़ दिया।