अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पटेल का निर्वासन रोकने से किया इनकार

अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक पंकज ने साल 2007 में ग्रीन कार्ड पाने के लिए यूएस सि​टीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस (USCIS) में आवेदन किया था। USCIS ने स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पटेल का निर्वासन रोकने से किया इनकार
Photo : www.hks.harvard.edu

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने एक भारतीय नागरिक के खिलाफ फैसला सुनाया है, जिसके बाद अब उस शख्स को अमेरिका से निकाला जा सकता है। मामला ड्राइविंग लाइेंस आवेदन फॉर्म से जुड़ा है जिसमें उस शख्स ने फॉर्म के उस बॉक्स को गलती से टिक कर दिया था जिसमें लिखा था कि वह अमेरिकी नागरिक है। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार याचिकाकर्ता पंकज कुमार पटेल ने 1990 के दशक में अपनी पत्नी ज्योत्सनाबेन के साथ अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश किया था।

अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक पंकज ने साल 2007 में ग्रीन कार्ड पाने के लिए यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस (USCIS) में आवेदन किया था। USCIS ने स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। क्योंकि USCIS को यह जानकारी मिली थी कि पटेल ने जॉर्जिया राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन में झूठा कहा था कि वह एक अमेरिकी नागरिक है। अदालत के दस्तावेजों में यह भी कहा गया कि इसके कुछ वर्षों के भीतर अमेरिकी सरकार ने पटेल के खिलाफ कार्यवाही शुरू की। दरअसल पटेल अप्रवासन न्यायाधीश के सामने यह तर्क रखने में सफल नहीं हो पाया कि उसने फॉर्म में अमेरिकी नागरिक वाले बॉक्स पर गलती से निशान लगा दिया था और इसलिए उसने कानून का उल्लंघन नहीं किया।

बेंच पर बैठीं ट्रम्प प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गईं न्यायाधीश एमी कोनी बैरेट ने अपने फैसले में लिखा कि दया की गुंजाइश है लेकिन अमेरिकी कांग्रेस ने अटॉर्नी जनरल को ही कुछ मामलों में निर्वासन से राहत देने की शक्ति दी हुई है।

जज के असहमत होने के बाद पटेल ने इमिग्रेशन अपील बोर्ड में अपील की हालांकि वह वहां भी हार गया। इसके बाद पटेल ने फेडरल कोर्ट के सामने गुहार लगाई, जहां कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। आखिर में पटेल ने पिछले साल जनवरी में अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और अदालत ने दिसंबर में मौखिक दलीलें सुननी शुरू कीं। हालांकि आखिरकार सुप्रीम कोर्ट निचली अदालत के फैसले से सहमत हो गया।

बेंच पर बैठीं ट्रम्प प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गईं न्यायाधीश एमी कोनी बैरेट ने अपने फैसले में लिखा कि इस प्रक्रिया में संघीय अदालतों की बहुत सीमित भूमिका है। हालांकि उन्होंने कहा कि दया की गुंजाइश है लेकिन अमेरिकी कांग्रेस ने अटॉर्नी जनरल को ही कुछ मामलों में निर्वासन से राहत देने की शक्ति दी हुई है।

दूसरी ओर व्हाइट हाउस की प्रेस वार्ता के दौरान भी इस मामले को उठाया गया। यह पूछे जाने पर कि क्या बाइडेन प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा तो व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कारीन जीन पियरे ने कहा कि यह न्याय विभाग से जुड़ा मामला है और वह ही फैसला लेगा। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार पटेलों के तीन बेटे हैं जिनमें से एक अमेरिकी नागरिक है। जबकि अन्य दो कानूनी स्थायी निवासी हैं और अमेरिकी नागरिकों से विवाहित हैं।