यूक्रेन के समर्थन में इन देशों की यात्रा करेगा अमेरिकी दल, भारतीय नेताओं से भी करेगा मुलाकात

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य इस बात की जानकारी जुटाएंगे कि रूस के हमले के खिलाफ अमेरिका, यूक्रेन और अन्य नाटो सहयोगियों का समर्थन कैसे जारी रख सकता है। प्रतिनिधिमंडल संयुक्त अरब अमीरात, भारत, नेपाल और जर्मनी में कई प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेगा

यूक्रेन के समर्थन में इन देशों की यात्रा करेगा अमेरिकी दल, भारतीय नेताओं से भी करेगा मुलाकात

चार सीनेटरों और एक सदन के सदस्य सहित डेमोक्रेटिक सांसदों का एक समूह यूक्रेन के समर्थन में नौ दिवसीय दौरे पर पोलैंड, भारत, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा करेगा। अमेरिका के सीनेटर कोरी बुकर, डी-एनजे आदि आने वाले हफ्ते में इन देशों का दौरा करेंगे। सोमवार को इसकी घोषणा की गई है। इस यात्रा का मकसद भारत, जर्मनी सहित कई देशों से संबंधों को मजबूत बनाना है जो यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका की बातों में न आकर अपनी स्वतंत्र नीति पर कायम रहे।

सेन मार्क केली (डी-एरिज) ने हाल ही में इस यात्रा की घोषणा की, लेकिन कहा कि सुरक्षा चिंताओं के कारण कार्यक्रम पर अतिरिक्त विवरण जारी नहीं किया जा सकता। केली के साथ यात्रा करने वाले अन्य सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड (डी-एनवाई), कोरी बुकर (डी-एन.जे.), एड मार्के (डी-एमए), मोंडायर जोन्स (डी-एनवाई) शामिल हैं।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पोलैंड में अमेरिकी सैन्य नेतृत्व और सैनिकों के साथ मिलेंगे। 

बताया गया है कि इस दौरे में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पोलैंड में अमेरिकी सैन्य नेतृत्व और सैनिकों के साथ मिलेंगे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य इस बात की जानकारी जुटाएंगे कि रूस के हमले के खिलाफ अमेरिका, यूक्रेन और अन्य नाटो सहयोगियों का समर्थन कैसे जारी रख सकता है। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल संयुक्त अरब अमीरात, भारत, नेपाल और जर्मनी में कई प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेगा ताकि बढ़ते वैश्विक तनाव की इस अवधि के दौरान संबंधों को मजबूत किया जा सके। पोलैंड के अलावा, यात्रा कार्यक्रम के प्रमुख देशों ने यूक्रेन से युद्ध की वजह से रूस को अलग-थलग करने के अमेरिका के प्रयासों से खुद को करीब करीब अलग ही रखा।

सबसे अहम है दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश रूस के मामले में अपनी स्वतंत्र नीति पर कायम रहा और किसी के दबाव में नहीं आया। इसके अलावा तेल-समृद्ध खाड़ी देशों ने तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए वैश्विक बाजार में अपनी तेल आपूर्ति बढ़ाने के लिए यूएस के प्रस्ताव का विरोध किया था। जर्मनी ने भी अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों के तेल कें प्रस्ताव का विरोध किया था।

वहीं, नेपाल उन कुछ एशियाई देशों में शामिल है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय तटस्थता की अपनी नीति से अलग होकर यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा की है। सांसदों का यह समूह उन अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडलों में से अलग जिन्होंने युद्ध की शुरुआत के बाद से ज्यादातर यूरोप की यात्रा की है।