अमेरिकी लॉ प्रोफेसर ने खुलेआम की भारतीय प्रवासियों की आलोचना, सोशल मीडिया पर घिरीं

एक वीडियो में वैक्स अप्रवासी भारतीयों के बारे में बोल रही हैं। उसे यह कहते हुए सुना गया कि यहां समस्या यह है कि उन्हें (भारत की ब्राह्मण महिलाओं को) सिखाया जाता है कि वे हर किसी से बेहतर हैं क्योंकि वे ब्राह्मण कुल से हैं।

अमेरिकी लॉ प्रोफेसर ने खुलेआम की भारतीय प्रवासियों की आलोचना, सोशल मीडिया पर घिरीं

अमेरिका में नस्लवाद का मुद्दा लंबे समय से चल रहा है। निरंतर विरोध और प्रदर्शनों के बाद कुछ नेता समाज में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में सफल रहे जो विविध जातियों के लोगों के पक्ष में थे। हालांकि दशकों बाद भी कुछ जगह स्थिति उसी कदम पर खड़ी होती दिख रही है जो 10 साल पहले थी।

यदि आप सोच रहे हैं कि स्थिति कितनी खराब हो सकती है तो हम आपको अमेरिका में पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के एक कार्यकाल के प्रोफेसर का यह वीडियो पेश करना चाहते हैं। अमेरिका के टकर कार्लसन टॉक शो में अप्रवासियों और अन्य जातियों के लोगों के बारे में बोलते हुए प्रोफेसर एमी वैक्स के इस वक्त दो वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें उन्हें अप्रवासी भारतीयों के ​बारे में बोलते हुए देखा जा सकता है।

एक वीडियो में वैक्स अप्रवासी भारतीयों के बारे में बोल रही हैं। उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि यहां समस्या यह है कि उन्हें (भारत की ब्राह्मण महिलाओं को) सिखाया जाता है कि वे हर किसी से बेहतर हैं क्योंकि वे ब्राह्मण कुल से हैं। जबकि हकीकत यह है कि किसी न किसी स्तर पर उनका देश एक शिट होल है यानी बहुत बुरा स्थान है। एक अन्य वीडियो में उन्हें यह कहते हुए भी सुना गया कि कैसे अश्वेत और एशियाई लोग अपनी बाहरी उपलब्धियों और योगदान के जरिए पश्चिमी लोगों के खिलाफ नाराजगी, शर्म और ईर्ष्या पैदा करते हैं।

यह दो वीडियो वायरल होने के बाद कई  नेटिजेंस यानी इंटरनेट पर यूजर्स ने प्रोफेसर एमी वैक्स को इस अपमानजनक साक्षात्कार को लेकर जबरदस्त तरीके से घेरा और अपनी नाराजगी दर्ज की। नेटिजेंस ने एमी वैक्स को उनके इस साक्षात्कार को 'श्वेत अभिजात्य प्रचार' कहने में संकोच नहीं किया। कुछ ने यह भी कहा कि कैसे एक कॉलेज के प्रोफेसर के इस तरह के विचार राज्यों में घृणा अपराध को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कारण हैं।

फिलहाल उनके यह वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। चूंकि यह मसला नस्लवाद से जुड़ा है, इसलिए लग रहा है कि प्रोफेसर के ये वक्तव्य तूल पकड़ सकते हैं।