अमेरिका की नामी स्कॉलरशिप, चुने गए 58 छात्र, 4 भारतीय मूल के भी

स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति के लिए 30,000 डॉलर यानी लगभग 23 लाख रुपये भी मिलेंगे। 1975 में कांग्रेस ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन के जीवित स्मारक और सार्वजनिक सेवा के राष्ट्रीय स्मारक के रूप में ट्रूमैन छात्रवृत्ति को स्थापित किया था।

अमेरिका की नामी स्कॉलरशिप, चुने गए 58 छात्र, 4 भारतीय मूल के भी

अमेरिका के 53 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से ट्रूमैन स्कॉलर्स 2022 के लिए 58 छात्रों को चुना गया है, जिसमें चार भारतीय मूल के छात्र भी शामिल हैं। इनमें भारतीय अमेरिकी अमीषा ए कम्बाथ, इशिका कौल, अवि गुप्ता और भव जैन हैं।

मिली जानकारी के अनुसार इन छात्रों को संघीय सरकार के भीतर नेतृत्व प्रशिक्षण, कैरियर परामर्श और विशेष रोजगार के अवसरों के साथ-साथ स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति के लिए 30,000 डॉलर यानी लगभग 23 लाख रुपये भी मिलेंगे।

ट्रूमैन छात्रवृत्ति संयुक्त राज्य अमेरिका में सार्वजनिक सेवा के इच्छुक नेताओं के लिए प्रमुख स्नातक छात्रवृत्ति है, जो कॉलेज के जूनियर्स छात्रों को असाधारण नेतृत्व क्षमता के लिए दी जाती है और यह छात्रवृत्ति विशेष रूप से उन्हें दी जाती है जो सरकार, गैर-लाभकारी संगठन और सार्वजिनक सेवा के लिए वकालत और शिक्षा या अन्य क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

जिन भारतीय मूल के छात्रों को इस छात्र​वृत्ति के लिए चुना गया है ​उनमें एक कैलिफोर्निया की अमीषा हैं जो हार्वर्ड विश्वविद्यालय में सामाजिक अध्ययन और अर्थशास्त्र की पढ़ाई करती हैं। जबकि न्यूजर्सी में रहने वाली इशिका वेलेस्ली कॉलेज में अर्थशास्त्र और शांति और न्याय का अध्ययन करती हैं।

ऐसे ही अवि गुप्ता राजनीतिक विज्ञान और कंप्यूटर साइंस के साथ साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और अमेरिकी राजनीति में भी विशेषज्ञ बनने के लिए अध्ययन करते हैं। वहीं पेंसिल्वेनिया के भव जैन वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल वितरण और भविष्य के चिकित्सक-नीति निर्माता के रूप में नैदानिक ​​​​देखभाल को बदलने में रुचि रखते हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि 1975 में कांग्रेस ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन के जीवित स्मारक और सार्वजनिक सेवा के राष्ट्रीय स्मारक के रूप में ट्रूमैन छात्रवृत्ति को स्थापित किया था ताकि अमेरिका के 33वें राष्ट्रपति हैरी एस  ट्रूमैन की विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिले और आने वाली पीढियों को सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रेरित किया जा सके।