अमेरिका की यह एनजीओ अमृतसर में इसलिए लगाएगी '450 लघु वन'

इकोसिख संगठन इस अभियान में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी, शैक्षणिक संस्थानों, भारतीय प्रवासी, धार्मिक और सरकारी निकायों को शामिल करेगा। ये वन 100 फीसदी जैविक सामग्री से बने हैं और इनमें सामान्य की तुलना में 95 फीसदी से अधिक जीवित रहने की क्षमता है।

अमेरिका की यह एनजीओ अमृतसर में इसलिए लगाएगी '450 लघु वन'

अमेरिका के वाशिंगटन स्थित संगठन 'इकोसिख' ने एलान किया है कि वह अगले पांच वर्षों में भारत स्थित पंजाब राज्य के अमृतसर शहर में '450 गुरु नानक सेक्रेड फॉरेस्ट' लगाएगा। यह कार्य शहर की 450 वीं वर्षगांठ के अवसर पर पूरा हो जाएगा जो वर्ष 2027 में होगा। 'इको अमृतसर 450' शीर्षक के साथ इकोसिख संगठन 27 जून से पांच वर्षीय अभियान शुरू करेगा। दरअसल 27 जून को अमृतसर स्थापना दिवस भी है।

इकोसिख संगठन इस अभियान में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ( SGPC), शैक्षणिक संस्थानों, भारतीय प्रवासी, धार्मिक और सरकारी निकायों को शामिल करेगा। मालूम हो कि अमृतसर की आधारशिला गुरु रामदास ने 1577 में रखी थी। हाल के वर्षों में शहर की वायु गुणवत्ता में गिरावट आई है। इकोसिख के वन संयोजक चरण सिंह ने कहा कि पिछले 38 महीनों में उन्होंने गुरु नानक की 550वीं जयंती मनाने के लिए 10 लाख पेड़ लगाने के अपने लक्ष्य के तहत 400 से अधिक वन लगाए हैं।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि इकोसिख ने अपने हाथों में पंजाब और अन्य राज्यों में लघु वन उर्फ गुरु नानक सेक्रेड फॉरेस्ट लगाने का जिम्मा लिया है और इन क्षेत्रों की देसी वन प्रजातियों को पुनर्जीवित करके पुनर्वनीकरण और जैविक विविधता के संरक्षण का काम संभाला है। इकोसिख द्वारा पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर में 1,67,000 फलते-फूलते जंगली पेड़ों वाले 303 सूक्ष्म वन लगाए गए हैं।

मियावाकी पद्धति से बने इन वनों में अब तक 100 से अधिक देसी, दुर्लभ और लुप्तप्राय, जंगली वन प्रजातियों को जीवित बीज बैंकों के रूप में संरक्षित किया गया है। इन वन प्रजातियों पर वन सर्वेक्षणों के माध्यम से, प्रसिद्ध विशेषज्ञों द्वारा सत्यापित करने के अलावा विभिन्न शोध पत्रों के जरिए अच्छी तरह से शोध किया जाता है।

इकोसिख के मुताबिक ये वन 100 फीसदी जैविक सामग्री से बने हैं और इनमें सामान्य की तुलना में 95 फीसदी से अधिक जीवित रहने की क्षमता है। वे पक्षियों, कीड़ों और छोटे जीवों की कई देशी प्रजातियों को आकर्षित करते हैं जो उन्हें अपना आवास बनाने के लिए पर्याप्त सुरक्षित महसूस करते हैं।