सीमाओं के रक्षक बीएसएफ जवान देश के दुश्मनों के लिए कहर हैं

देश की फस्ट लाइन पर तैनात बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के हर एक जवान की जिंदगी हर पल खतरों से घिरी रहती है। यह खतरा चाहे दुश्मन से हो या फिर मौसम की मार से।

सीमाओं के रक्षक बीएसएफ जवान देश के दुश्मनों के लिए कहर हैं

भारत एक ऐसा देश है, जो बॉर्डर पर खतरे झेलने के साथ-साथ देश के भीतर भी कई परेशानियों से लगातार जूझ रहा है। आप और हम अपने-अपने घरों में चैन से बैठे हैं, परिवार के साथ टाइम बिताते हैं और मौका मिलते ही घूमने भी जाते हैं। ये संभव सिर्फ उन प्रहरियों की वजह से है, जो देश की सीमा पर इसलिए नहीं सोते, ताकि आप सो सकें। आज हम हम बात करने जा रहे हैं, देश की सीमा सुरक्षा बल (Border security force) की। 1965 में बनाई गई BSF को आज दुनिया का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल कहा जाता है।

भारत के बॉर्डर की लंबाई कुल 6500 किलोमीटर है। इसकी सुरक्षा के लिए बीएसएफ के ढाई लाख से अधिक जवान हर वक्त तैनात रहते हैं। बॉर्डर पर एक जगह जंगल है, जहां दुनिया के सबसे खतरनाक मच्छरों की प्रजातियां हैं, तो एक जगह ऐसी भी है, जहां बर्फ में हाथ गल सकता है और इंसान को बचाने के लिए हाथ काटना पड़ जाता है। ऐसे पेचीदा बॉर्डर की रक्षा करना कहने में जितना आसान है, असल में उतना है नहीं।

BSF- जीवन प्रयत्न कर्तव्य

India  celebrating republic day with the parade
Photo by Mitul Gajera / Unsplash

यह तीन शब्द जवानों को उस वक्त ही बता दिए जाते हैं, जब वह फौज में भर्ती होने के लिए मैदान पर पहला कदम रखता है। यानी जहां उसकी ट्रैनिंग शुरू होती है। इसका अर्थ है- जीवन जीने तक देश की रक्षा करना। जवानों को सुबह साढ़े तीन बजे ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद 5:15 बजे तक दौड़ लगाने से लेकर गन चलाने तक सभी ट्रैनिंग दी जाती है। ट्रैनिंग के बाद एक आम लड़का अनुशासित जवान बनकर तैयार होता है। ट्रैनिंग लगभग 50 हफ्ते तक चलती है।