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विस्फोट: कुछ सैकंड में ही धूल में मिल गए भारत के दो सबसे ऊंचे अवैध टावर

यह विवाद करीब डेढ़ दशक पुराना है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 31 अगस्त को इन टावरों को अवैध घोषित कर तीन माह में गिराने का आदेश दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस साल 22 मई को इन्हें ढहाया जाना था, लेकिन तैयारी पूरी नहीं थी। अब रविवार 28 अगस्त को इन टावरों को विस्फोट से उड़ा दिया गया।

भारत स्थित उत्तर प्रदेश के शहर नोएडा में दो अवैध सुपरटेक ट्विन टावरों को रविवार को विस्फोटकों से ध्वस्त कर जमींदोज कर दिया गया। इन टावरों को गिराने में करीब 3500 किलो विस्फोटक का प्रयोग किया गया। इसके लिए दोनों टावरों के पिलर में 9800 छेद किए गए। भारत में पहली बार इतनी ऊंची इमारतों को विस्फोटक से उड़ाया गया है। इनमें एपेक्स टावर 32 मंजिल और 102 मीटर ऊंचा है। सियान 29 मंजिल और करीब 95 ऊंचा है।

टावरों को गिराने से पूर्व करीब 30 मिनट तक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को बंद कर दिया गया था।

ट्विन टावर सिर्फ 9-12 सेकेंड में धूल में मिल गए। इनसे करीब 88000 टन मलबा निकलने की संभावना है। जिसे हटाने में 3 महीने का समय लगेगा। इन ट्विन टावरों को ध्वस्त करने के लिए दक्षिण अफ्रीकी कंपनी जेट डिमोलिशन के निदेशक जो ब्रिंकमैन ने ही इस इमारत का ब्लास्ट डिजाइन तैयार किया। उन्हें इस क्षेत्र में करीब 40 वर्षों का अनुभव है।

टावरों को गिराने से पूर्व करीब 30 मिनट तक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को बंद कर दिया गया था। भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया। इसके अलावा ट्विन टावर के आसपास स्थित रिहायशी इलाकों खासकर एमरॉल्ड कोर्ट सोसायटी और एटीएस सोसायटी को खाली करा दिया गया था। इसके अलावा वहां मेडिकल, हाउस कीपिंग स्टाफ और एनडीआरएफ की टीम भी तैनात की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में 31 अगस्त 2021 को फैसला देते हुए दोनों टावर को तीन महीने में ध्वस्त करने का आदेश दिया था।

वहां विस्फोट के दौरान धूल का जबर्दस्त गुबार उठा। इतना बड़ा गुबार भारत में पहली बार देखा गया। इस गुबार को शांत करने के लिए फायर ब्रिगेड की आधुनिक गाड़ियों व उनके कर्मियों द्वारा अन्य छतों से पानी का छिड़काव किया गया। स्थिति से निपटने के लिए वहां ध्वनि व वायु प्रदूषण मापने के उपकरण भी लगाए गए।

11 अप्रैल 2014 में प्राधिकरण ने दोनों टावर को तोड़ने का आदेश दिया। इस फैसले को सुपरटेक ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में 31 अगस्त 2021 को फैसला देते हुए दोनों टावर को तीन महीने में ध्वस्त करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डेढ़ दशक पुराने इस मामले की गहन जांच कराई।

नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई इस गगनचुंबी इमारत के निर्माण में नोएडा विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों और बिल्डर की मिलीभगत की बात साबित हुई। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डेढ़ दशक पुराने इस मामले की गहन जांच कराई। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण में संलिप्त 26 अधिकारियों/कर्मचारियों, सुपरटैक लिमिटेड के निदेशक एवं उनके वास्तुविदों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

इसी मामले में अक्टूबर 2021 में प्राधिकरण के संलिप्त अधिकारी, सुपरटैक लिमिटेड के निदेशक और आर्किटेक्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। मामले में संलिप्त ऐसे 4 अधिकारी, जो वर्तमान में अलग-अलग प्राधिकरणों में कार्यरत थे, को निलम्बित करते हुए शासन द्वारा उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की गई।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 2020 में केरल के कोच्चि इलाके में चार टावरों को विस्फोटकों से उड़ाया गया था। Photo: Wikipedia

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 2020 में केरल के कोच्चि इलाके में चार टावरों को विस्फोटकों से उड़ाया गया था। केरल में ढहाए गए चार टावरों में तीन की ऊंचाई 17 मंजिल और एक की ऊंचाई 19 मंजिल थी। वहीं देश के बाहर अब तक करीब 200 इमारतों को गिराया जा चुका है। इनमें सबसे पहले ब्राजील में वर्ष 1975 में विल्सन मेंडस नामक 110 मीटर ऊंची इमारत को मेट्रो स्टेशन का रास्ता बनाने के लिए ध्वस्त किया गया था। दुनियाभर में अभी तक करीब 50 मीटर से ऊंचे 200 टावर ध्वस्त किए गए हैं।

सभी फोटो: राजीव भट्ट

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