अब न खील-बताशे, न टेसू और न झांझी, हाइटेक हो गई है अब दीपावली

भारत के अधिकतर राज्यों में कुछ साल पहले तक दीपावली उमंगों का पर्व हुआ करती थी। इस पर्व से पहले और बाद तक लोगों में एक अलग ही रंगत और अपनापन दिखाई देता था। आज हम आपको बता रहे हैं कि सालों पहले इस दीपोत्सव को कैसे मनाया जाता था।

अब न खील-बताशे, न टेसू और न झांझी, हाइटेक हो गई है अब दीपावली

भारत के अधिकतर राज्यों व देश की राजधानी दिल्ली में कुछ साल पहले तक दिवाली पर्व को भक्तिभाव, हर्षोंल्लास व अपनेपन से मनाया जाता था। अलग ही गरिमा हुआ करती थी इस दीपोत्सव की। त्योहार आज भी मनाया जा रहा है लेकिन दीपक, रंगोली, फुलझड़ी और मिठाई का यह पौराणिक पर्व अब खासा हाईटेक हो गया है। यह पर्व अब पश्चिमी खानपान और गिफ्ट के लेनदेन का रूप ले चुका है। पुराने वक्त में दीवाली का पर्व किस तरह मनाया जाता था, आज इसकी बानगी हम आपको बता रहे हैं। हो सकता है कि आप हैरान हो जाएं।