अमेरिका के विपरीत प्राकृतिक वातावरण में राजस्थान अतुल्य लगा

होटल के कमरे को स्वच्छ करने के लिए अफ्रीकन अमेरिकन मूल की एक विशालकाय माताजी आती थीं। उन्हें देखकर मुझे रामायण धारावाहिक में लंका का अभिनय करने वाली कलाकार का चित्र स्मरण हुआ। उनका स्वभाव बहुत अच्छा था, पूरी निष्ठा व शांत भाव से साफ सफाई करती थीं।

अमेरिका के विपरीत प्राकृतिक वातावरण में राजस्थान अतुल्य लगा

अमेरिका यात्रा - अंक 14

रविवार की रात बर्फ़ पड़ी थी। प्रातः एम्बेसी जाने लगा तब होटल के अंदर एवं बाहर ज्येष्ठ व पौष मास तथा केरल व कश्मीर जैसा दृश्य था। पाताल लोक की बर्फीली छवि के प्रथम दर्शन हुए।

बर्फ़ पिघलाने के लिए रात को ही सड़कों पर नमक बिखेर दिया गया था।

बर्फ पिघलाने के लिए रात को ही सड़कों पर नमक बिखेर दिया गया था, अतः स्वच्छ मार्ग के अतिरिक्त गांधी प्रतिमा परिसर तथा दूतावास के बाहर बर्फ की ही श्वेत चद्दर बिछी थी। ऐसे में दूतावास एवं होटल के हीटिंग सिस्टम का महत्व समझ आ गया। यही सोच रहा था कि अमेरिका के इस विपरीत प्राकृतिक वातावरण में जीने के लिए मनुष्य को कितना संघर्ष करना पड़ता है, मेरा राजस्थान अतुल्य है।