नॉटिंघम में फिर सिख फेस्टिवल की बहार,कीर्तन और तलवारबाजी का जलवा

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की वजह से पिछले दो वर्षों से इस पारंपरिक समारोह का आयोजन नहीं हो पा रहा था। वार्षिक रूप से होने वाले इस कार्यक्रम में एक परेड निकाली जाती है, तलवारबाजी का प्रदर्शन होता है और ध्यान किया जाता है।

नॉटिंघम में फिर सिख फेस्टिवल की बहार,कीर्तन और तलवारबाजी का जलवा
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ब्रिटेन के नॉटिंघम में तीन साल बाद पहली बार सिख फेस्टिवल का आयोजन हुआ। आयोजकों ने बताया कि इस दौरान नॉटिंघम की सड़कों पर निकले जुलूस में लगभग 3500 लोगों ने हिस्सा लिया। यह जुलूस दो सप्ताह पहले ही निकलना था लेकिन ट्रैफिक प्रबंधन के कुछ मुद्दों के चलते स्थगित कर दिया गया था।

नॉटिंघम में रविवार की सुबह भजनों के साथ हुई जब शहर के कई गुरुद्वारों से होकर नगर कीर्तन जुलूस निकला। Photo : www.nottinghampost.com

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की वजह से पिछले दो वर्षों से इस पारंपरिक समारोह का आयोजन नहीं हो पा रहा था। वार्षिक रूप से होने वाले इस कार्यक्रम में एक परेड निकाली जाती है, तलवारबाजी का प्रदर्शन होता है और ध्यान किया जाता है। बैसाखी त्योहार पर खालसा पंथ की स्थापना का जश्न होता है।

नॉटिंघम में रविवार की सुबह भजनों के साथ हुई जब शहर के कई गुरुद्वारों से होकर नगर कीर्तन जुलूस निकला। आयोजक गगन जोहल ने कहा कि महामारी के दौरान घर पर यह त्योहार मनाना पहले जैसा नहीं था। उन्होंने कहा कि पारंपरिक त्योहारों का आयोजन फिर से शुरू होने के बाद उत्साह का माहौल है।

कार्यक्रम के आयोजन में मदद करने वाले गगनदीप सिंह ने कहा कि जुलूस शानदार था। उन्होंने कहा कि हमें बस इस बात की चिंता थी कि कहीं बारिश न हो जाए। लेकिन, मौसम भी बहुत अच्छा रहा। जुलूस की शुरुआत लेंटन में सुबह 10 बजे हुई थी जो ओल्ड बेस्फोर्ड में दोपहर 3.30 बजे के आसपास पूरा हुआ। बता दें कि इस कार्यक्रम का आयोजन पहले आठ मई को होना था लेकिन यातायात से संबंधित कुछ समस्याओं के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। बैसाखी के दिन सिख सुबह के समय गुरुद्वारे जाते हैं और सेवा करते हैं।  इसके बाद वह सड़कों और गलियों में जुलूस निकालते हैं जिसे नगर कीर्तन कहा जाता है।