'काश' पटेल की किताब को ट्रंप ने अमेरिका के स्कूलों में रखने को क्यों कहा?

इस पुस्तक का शीर्षक है ‘द प्लॉट अगेंस्ट द किंग’। पुस्तक में दावा किया गया है कि ‘किंग डोनाल्ड’ पर कोमी और हिलेरी क्विंटन ने धोखा देने का गलत और मनगढ़ंत आरोप लगाया था। लेकिन ‘जादूगर पटेल’ और ‘ड्यूक डेविन’ ने डोनाल्ड को बचाने में मदद की।

'काश' पटेल की किताब को ट्रंप ने अमेरिका के स्कूलों में रखने को क्यों कहा?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के अपने एक समर्थक कश्यप 'काश' प्रमोद पटेल द्वारा लिखी गई बच्चों की किताब का समर्थन किया है। इस किताब में ट्रंप के बारे में कथित दुष्प्रचार का उजागर करने का दावा किया गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने अनुयायियों से इस शानदार किताब को अमेरिका के हर स्कूल में रखने का आग्रह किया है।

इस पुस्तक का शीर्षक है ‘द प्लॉट अगेंस्ट द किंग’। पुस्तक में दावा किया गया है कि ‘किंग डोनाल्ड’ पर कोमी और हिलेरी क्विंटन ने धोखा देने का गलत और मनगढ़ंत आरोप लगाया था। लेकिन ‘जादूगर पटेल’ और ‘ड्यूक डेविन’ ने डोनाल्ड को बचाने में मदद की। पुस्तक के माध्यम से ट्रंप-रूस की कथित मिलीभगत की एफबीआई जांच के बारे में कथित झूठ को बताया गया है।

हालांकि द गार्जियन ने किताब के बारे में उल्लेख किया है कि पटेल की किताब में एफबीआई जांच के बारे में डोनाल्ड ट्रंप के झूठे दावों का विवरण देता है। इसके लिए बच्चों के काल्पनिक पात्रों का उपयोग किया जाता है जिससे जांच को लेकर एक संशोधनवादी चेहरा प्रदान किया जा सके। पुस्तक को रूढ़िवादी प्रकाशक ब्रेव बुक्स द्वारा प्रकाशित किया गया है। जो पुस्तक को सच्ची कहानी की एक काल्पनिक चित्रण कहते हैं। इसमें पटेल को देश के सबसे बड़े अन्यायों में से एक को उजागर करने में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में वर्णित करते हुए कहा गया है कि पुस्तक पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ हिलेरी की भयानक साजिश की एक काल्पनिक कहानी सामने लाती है।

वहीं, पिछले महीने गूगल ने अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म से इस पुस्तक को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। फॉक्स बिजनेस ने गूगल से ब्रेव बुक्स के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि गूगल नहीं चाहता कि उपयोगकर्ता विज्ञापनों में प्रचारित सामग्री से गुमराह हों। हालांकि बाद में निलंबन वापस ले लिया गया। लेकिन पटेल ने टीवी पर एक शो के दौरान गूगल के निलंबन के कदम की तीखी आलोचना की।