ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के बीच भारतीयों का बढ़ रहा है वर्चस्व, चीनी भाई पिछड़े!

पिछले एक दशक में यानी 2011 से 2021 के बीच भारतीय मूल के प्रवासियों में 3,73,000 की वृद्धि हुई है। इसके बाद चीनी समुदाय में 2,08,000 और फिलीपींस प्रवासियों की संख्या में 1,18,000 का इजाफा हुआ है। हालांकि महामारी के चलते ऑस्ट्रेलिया की आबादी में प्रवासियों का अनुपात एक साल में कम हुआ है।

ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के बीच भारतीयों का बढ़ रहा है वर्चस्व, चीनी भाई पिछड़े!
Photo by Nico Smit / Unsplash

पिछले 10 वर्षों के भीतर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासी समूह सबसे बड़ा प्रवासी समूह बनकर उभरा है। भारतीय प्रवासियों ने चीनी समुदाय को ऑस्ट्रेलिया में दूसरे स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया है। यह जानकारी मंगलवार को ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने साझा की है।

मिली जानकारी के मुताबिक सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक दशक में यानी 2011 से 2021 के बीच भारतीय मूल के प्रवासियों में 3,73,000 की वृद्धि हुई है। इसके बाद चीनी समुदाय में 2,08,000 और फिलीपींस प्रवासियों की संख्या में 1,18,000 का इजाफा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया की आबादी में चीन की 2.3 फीसदी की तुलना में अब भारतीयों की आबादी 2.8 फीसदी है।

ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षों के भीतर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासी समूह सबसे बड़ा प्रवासी समूह बनकर उभरा है।

हालांकि महामारी के चलते ऑस्ट्रेलिया की आबादी में प्रवासियों का अनुपात एक साल में 29.8 फीसदी से घटकर 29.1 फीसदी हो गया है। इसकी प्रमुख वजह ऑस्ट्रेलिया की सीमाओं का बंद होना भी है। यानी इस अवधि में लगभग कोई नया आगमन नहीं हुआ बल्कि कुछ ऑस्ट्रेलियाई अन्य देशों में चले गए। साल 2016 के सबसे हालिया आंकड़ों के अनुसार आधे से थोड़े कम ऑस्ट्रेलियाई खुद विदेशों में पैदा हुए थे या उनके माता पिता बाहर से आकर आस्ट्रेलिया में आकर बसे थे।।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि अप्रवासियों ने ऑस्ट्रेलिया में 28 साल तक मंदी से बचने में एक केंद्रीय भूमिका निभाई है। हालांकि अप्रवासियों के स्रोत के रूप में चीन दूसरे से तीसरे स्थान पर आ गया क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच व्यापारिक साझेदार के बीच संबंध बिगड़ रहे हैं। साल  2020 में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कोरोनो वायरस की उत्पत्ति को लेकर एक स्वतंत्र जांच की भी मांग की थी जिसका पहला मरीज चीनी के शहर वुहान में सामने आया था।