NRI भारत में ऐसे खुलवा सकते हैं बैंक खाता, फिक्स डिपॉजिट भी कर सकते हैं

एनआरई अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज एनआरआई के हाथों में टैक्स फ्री होता है। एनआरई अकाउंट उस पैसे से खुलवाया जा सकता है जो विदेश से भारत में भेजा जाता है। वहीं, रुपये में लेनदेन के लिए एनआरआई, एनआरओ अकाउंट खुलवा सकते हैं।

NRI भारत में ऐसे खुलवा सकते हैं बैंक खाता, फिक्स डिपॉजिट भी कर सकते हैं
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एक व्यक्ति जो रोजगार, व्यवसाय या किसी अन्य कारण से भारत से बाहर रह रहा है, उन्हें एनआरआई या अनिवासी भारतीय के रूप में जाना जाता है। क्या ऐसे एनआरआई भारत में अपना बैंक खाता खोल सकते हैं। इसमें तीन तरह के खाते होते हैं। पहला, नॉन रेजिडेंट (एक्सटर्नल) रुपी अकाउंट (एनआरई अकाउंट)। दूसरा, नॉन रेजिडेंट (ऑर्डिनरी) रुपी अकाउंट (एनआरओ अकाउंट) और तीसरे तरह का अकाउंट फॉरेन करेंसी (नॉन रेजिडेंट) अकाउंट (एफसीएनआर अकाउंट) होता है।

जब भारत का निवासी एनआरआई बन जाता है तो उसे बैंक को सूचना देनी पड़ती है। Photo by rupixen.com / Unsplash

एनआरई अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज एनआरआई के हाथों में टैक्स फ्री होता है। एनआरई अकाउंट उस पैसे से खुलवाया जा सकता है जो विदेश से भारत में भेजा जाता है। वहीं, रुपये में लेनदेन के लिए एनआरआई, एनआरओ अकाउंट खुलवा सकते हैं। इस अकाउंट में फंड एक लिमिट के साथ विदेश में भेजा जा सकता है। यह लिमिट आरबीआई तय करता है। एनआरओ अकाउंट बैलेंस का इस्तेमाल सिर्फ भारत के भीतर रुपये में पेमेंट के लिए होता है।

एफसीएनआर सिर्फ 1 साल से 5 साल के टर्म डिपॉजिट के तौर पर खोले जा सकते हैं. डिपॉजिट आसानी से बदल जाने वाली विदेशी मुद्रा में किया जा सकता है। एफसीएनआर (बी) अकाउंट में सिर्फ एनआरआई संयुक्त खातेदार हो सकते हैं। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट को भारत में निवेश का सबसे सुरक्षित जरिया माना जाता है। लेकिन यह केवल भारत के निवासियों तक ही सीमित नहीं है। एनआरआई या अनिवासी भारतीयों भी एनआरआई फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) खाते खुलवा सकते हैं।

जब भारत का निवासी एनआरआई बन जाता है तो उसे बैंक को सूचना देनी पड़ती है। इसमें उन्हें बैंक से अनुरोध करना होता है कि उनके मौजूदा सेविंग बैंक अकाउंट को एनआरओ अकाउंट में बदला जाए। भारत में लौटने वाले एनआरआई रेजिडेंट फॉरेन करेंसी अकाउंट खुलवा सकते हैं जिससे एनआरई या एफसीएनलआर अकाउंट में बैलेंस को इसमें रखा जा जा सके।

एक एनआरआई विदेश से भी खाता खोल सकता है। ऐसे में उन्हें पासपोर्ट और वीजा आदि की कॉपी के साथ भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क कर इसकी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। एक एनआरआई विदेश जाने से पहले खाता खोलने की औपचारिकताएं जीरो बैलेंस के साथ पूरी कर सकता है। हालांकि इसके बाद उसे तय समय के भीतर खाते को चालू रखने के लिए धनराशि भेजनी होगी, उसके बाद एक चेक बुक जारी की जाएगी। एनआरआई अपने एनआरई/एनआरओ खातों से स्थानीय भुगतान करने के लिए भारत में किसी को नॉमिनेट कर सकता है। नॉमिनेट शख्स नाबालिग भी हो सकता है। लेकिन इस मामले में नाबालिग की ओर से भुगतान हासिल करने के लिए एक अभिभावक को नियुक्त करना होगा।