आखिरकार 69 वर्ष बाद फिर टाटा की हुई महाराजा

एयर इंडिया यानी उस वक्त की टाटा एयरलाइंस की स्थापना उद्योगपति जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा ने 1932 में की थी और अगले कुछ दशकों में यह भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वाहक के रूप में विकसित हो गई थी। टाटा एयरलाइंस की पहली निर्धारित उड़ान ने कराची से उड़ान भरी थी।

आखिरकार 69 वर्ष बाद फिर टाटा की हुई महाराजा

एक लंबे इंतजार के बाद भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन एयर इंडिया अब टाटा ग्रुप का दोबारा से हिस्सा बन गई है। सरकार और टाटा ग्रुप के बीच सभी समझौते और औपचारिकताएं आज पूरी हो गईं। इस दिन का ​इंतजार टाटा ग्रुप को 69 साल से था। विशेष बात यह है कि जिस दिन टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया की बिड जीती थी, उस दिन टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने एक इमोशनल नोट लिखकर कहा था कि आज जेआरडी टाटा अगर हमारे बीच होते तो उन्हें बेहद खुशी होती। उन्होंने नोट में आगे लिखा था कि जेआरडी टाटा के नेतृत्व में एयर इंडिया ने एक समय में दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइनों में अपनी जगह बनाई थी। टाटा ग्रुप के पास अब मौका है कि वह उसी छवि और प्रतिष्ठा को दोबारा से बनाए।

आज एयर इंडिया के टाटा ग्रुप में शामिल होने के बाद टाटा संस के चेयमैन ए चंद्रशेखरन ने कहा कि हम एयर इंडिया के टाटा ग्रुप में वापसी को लेकर बेहद खुश हैं। हम एयर इंडिया को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए सभी का सहयोग चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा कि औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया पूरा हुई। शेयरों को टैलेस प्राइवेट लिमिटेड को स्थानांतरित कर दिया गया है जो एयर इंडिया का नया मालिक है।