एशियाई अमेरिकी दिग्गजों के सम्मान में आयोजित हुआ AAPI का विशेष कार्यक्रम

एएपीआई सैल्यूट टू सर्विस कार्यक्रम के तहत 'अज्ञात सैनिक की कब्र' (Tomb of the Unknown Soldier) पर औपचारिक पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी सेना के कैप्टन हुमायूं खान के ब्यूरियल प्लॉट तक वॉक ऑफ रिफ्लेक्शन आयोजित की गई।

एशियाई अमेरिकी दिग्गजों के सम्मान में आयोजित हुआ AAPI का विशेष कार्यक्रम

एशियन अमेरिकंस एंड पैसिफिक आइलैंडर्स (AAPI) की ओर से दिग्गजों को सम्मानित करने के लिए वर्जीनिया में अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में AAPI Salute to Service नाम से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसमें कई एशियाई अमेरिकी समूहों के साथ साउथ एशियंस फॉर अमेरिका (SAFA) के सदस्य भी शामिल हुए थे।

SAFA जमीनी स्तर पर काम करने वाला एक संगठन है जो अमेरिका में स्थानीय, राज्य व संघीय स्तर पर दक्षिण एशियाई लोकतांत्रिक समुदाय के लिए शिक्षा, वकालत, गतिविधियों और गतिशीलता के लिए समर्पित है। इसके लिए वह नागरिक जुड़ाव, राजनीतिक सहभागिता व नेटवर्क को बढ़ावा देता है।

एएपीआई सैल्यूट टू सर्विस कार्यक्रम के तहत 'अज्ञात सैनिक की कब्र' (Tomb of the Unknown Soldier) पर औपचारिक पुष्पांजलि अर्पित की गई।

एएपीआई सैल्यूट टू सर्विस कार्यक्रम के तहत 'अज्ञात सैनिक की कब्र' (Tomb of the Unknown Soldier) पर औपचारिक पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी सेना के कैप्टन हुमायूं खान के ब्यूरियल प्लॉट तक वॉक ऑफ रिफ्लेक्शन आयोजित की गई। कैप्टन खान का इराक युद्ध में कार्रवाई के दौरान निधन हो गया था। कार्यक्रम में शामिल होने वालों में एक्टिव सर्विस मेंबर, एएपीआई सामुदायिक नेता और चयनित नेताओं के प्रतिनिधि शामिल रहे।

यहां गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर यूएस नेवी रिजर्व के लेफ्टिनेंट मार्क अरेवालो, नौसेना की सेवानिवृत्त कैप्टन सिंथिया मैक्री और साफा एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य खिज्र खान शामिल हुए। संगठन ने कहा कि यह कार्यक्रम हम एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हमारे समुदाय के देश सेवा चुनने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।

एसएएफए की एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी राष्ट्रीय निदेशक नेहा दीवान ने कहा कि देश सेवा का रास्ता चुनने वाले हमारे समुदाय के लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है। यह कार्यक्रम हमारे समुदाय के लिए ऐसे लोगों को पहचानने की और उनकी उपलब्धियों तथा उनके बलिदानों के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का एक अवसर है।