31 साल बाद फिर रिलीज को तैयार 'मिसीसिपी मसाला', आखिर क्यों?

इस फिल्म की स्क्रीनप्ले राइटर सूनी तारापोरवाला मानती हैं कि यह फिल्म आज के समय में भी अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा की नई पीढ़ी को प्रभावित करेगी। साल 1991 में वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म ने गोल्डन ओसेला बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले अवार्ड जीता था।

31 साल बाद फिर रिलीज को तैयार 'मिसीसिपी मसाला', आखिर क्यों?

भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्माता मीरा नायर की फिल्म 'मिसीसिपी मसाला' 15 अप्रैल को नए कलेवर के साथ अमेरिका में फिर से रिलीज होने के लिए तैयार है। इस फिल्म का सबसे पहला प्रीमियर 31 साल पहले 1991 में फ्रांस में हुआ था। डेंजेल वॉशिंगटन और सरिता चौधरी ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है और यह फिल्म युगांडा में भारतीयों को नस्लवाद और जेनोफोबिया (विदेशी लोगों से नफरत) का शिकार बनाए जाने पर आधारित है।

इस फिल्म की स्क्रीनप्ले राइटर सूनी तारापोरवाला मानती हैं कि यह फिल्म आज के समय में भी अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा की नई पीढ़ी को प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा, 'जब यह फिल्म पहली बार सामने आई थी तब मैं भारत में थी। तब ऐसी बातें सुनने को मिल रही थीं कि 'हम नस्लवादी नहीं हैं, हम ऐसे नहीं हैं' लेकिन यह सच नहीं है। हम दूसरों पर उंगली उठाना और उन्हें नस्लवादी कहना पसंद करते हैं। लेकिन जब हमारी बारी आती है तो हम इससे इनकार करते हैं।'

साल 1991 में वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 'मिसीसिपी मसाला' ने गोल्डन ओसेला बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले अवार्ड जीता था। 

तारापोरवाला कहती हैं कि नई पीढ़ी के लिए यह फिल्म बहुत प्रासंगिक होने वाली है, क्योंकि दुर्भाग्य से कुछ खास बदलाव नहीं आया है। फिल्म के दोबारा रिलीज होने पर अपने उत्साह को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब नई फिल्में थिएटर में रिलीज नहीं हो रही हैं हमारे लिए यह बहुत शानदार और रोमांचक है कि 30 साल पुरानी फिल्म को एक बार फिर से रिलीज किया जा रहा है। यह गर्व की बात है।

बता दें कि साल 1991 में वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म ने गोल्डन ओसेला बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले अवार्ड जीता था। तारापोरवाला ने यह भी बताया कि यह मिसीसिपी मसाला मीरा नायर के लिए बहुत खास है। जब हम फिल्म के लिए रिसर्च करने कंपाला गए थे तब वहां उनकी महमूद ममदानी से मुलाकात हुई थी। दोनों बाद में वैवाहिक बंधन में बंध गए थे। इस फिल्म में जो घर दिखाया गया है वह अब उनका ही है। उनके बेटे का जन्म भी उसी घर में हुआ है।

सूनी तारापोरवाला ने साल 1988 में आई फिल्म 'सलाम बॉम्बे' और 2006 में आई 'द नेमसेक' की पटकथा (स्क्रीनप्ले) भी लिखी है। 'द नेमसेक' पुलित्जर अवार्ड विजेता झुम्पा लहिरी के इसी नाम के उपन्यास पर बनी है। साल 2016 में उन्होंने एक 14 मिनट की डॉक्यूमेंट्री वर्चुअल रियलिटी फिल्म 'येह बेले' (Yeah Ballet) निर्देशित की थी। इसके बाद साल 2020 में उन्होंने इसी डॉक्यूमेंट्री पर एक फीचर फिल्म लिखी और निर्देशित की जो नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है।