संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की तलाश में भारत, क्या हैं रुकावटें

प्रमुख शक्तियां संयुक्त राष्ट्र में एक पुरानी प्रणाली से चिपके रहने की इच्छुक हैं, जिसका वर्तमान विश्व राजनीति से कोई संबंध नहीं है। निरंतर आगे बढ़ रहे देश अब UNSC में बदलाव का मसला लगातार उठा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की तलाश में भारत, क्या हैं रुकावटें
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पिछले पंद्रह वर्षों से लगातार समय-समय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के विस्तार का मुद्दा उठता रहता है। इसे वैश्विक संस्था के सबसे बड़े सुधार के रूप में देखा जाता रहा है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या भारत इस विकसित योजना का हिस्सा हिस्सा बनने जा रहा है। यह केवल सुरक्षा परिषद के विस्तार में ही नहीं, बल्कि स्थायी सदस्यों की संरचना में चर्चा का केंद्र रहा है। वर्तमान में पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो पॉवर है। इसलिए सुरक्षा परिषद के किसी भी विस्तार के लिए वीटो के साथ स्थायी सदस्यों का विस्तार भी देखना होगा। यहीं से बहुत सी आशंकाएं सामने आती हैं।

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यहां आने वाले गणमान्य व्यक्तियों से मीडिया का एक ही सवाल होता है: "क्या आप विस्तारित सुरक्षा परिषद का हिस्सा बनने के लिए भारत का समर्थन करते हैं?" अक्सर प्रतिक्रिया हमेशा अपेक्षित लाइनों के साथ सकारात्मक रही है। वास्तव में हमेशा से धारणा रही है कि भारत के सुरक्षा परिषद का हिस्सा बनने के बीच में चीन रोड़ा बन जाता है। लेकिन जहां तक ​​संयुक्त राज्य अमेरिका की बात है, तो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रम्प ने हमेशा भारत का समर्थन किया है।