छह भारतीय-अमेरिकियों को मिली गूगनहाइम फेलोशिप, कौन हैं ये लोग?

जिन छह भारतीय-अमेरिकियों को इस फेलोशिप से नवाजा गया है उनमें प्रशांत के जैन, श्रीकांत नारायणन, मंजुल भार्गव, सुपर्णा राजाराम, ज्योति पुरी और मनीषा सिन्हा के नाम शामिल हैं। इन सभी लोगों का चयन लगभग 2500 आवेदनों की गहन समीक्षा करने के बाद किया गया है। ये लोग अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दे रहे हैं।

छह भारतीय-अमेरिकियों को मिली गूगनहाइम फेलोशिप, कौन हैं ये लोग?

इस साल गूगनहाइम फेलो (Guggenheim Fellow) नामित किए गए 180 वैज्ञानिकों, लेखकों, विद्वानों और कलाकारों में छह भारतीय-अमेरिकी भी शामिल हैं। यह फेलोशिप देने वाली जॉन साइमन गूगनहाइम मेमोरियल फाउंडेशन (अमेरिका) ने कहा कि इन सभी लोगों का चयन लगभग 2500 आवेदनों की गहन समीक्षा करने के बाद किया गया है। ये लोग अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दे रहे हैं।

जिन छह भारतीय-अमेरिकियों को इस फेलोशिप से नवाजा गया है उनमें प्रशांत के जैन, श्रीकांत नारायणन, मंजुल भार्गव, सुपर्णा राजाराम, ज्योति पुरी और मनीषा सिन्हा के नाम शामिल हैं। इस फाउंडेशन की स्थापना साल 1925 में सीनेटर साइमन और ओल्गा गूगनहाइम ने अपने बेटे जॉन की स्मृति में की थी।

प्रशांत के जैन ने मुंबई में इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी में बीटेक किया था>

प्रशांत के जैन ने मुंबई में इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी में बीटेक किया था और जॉर्जिया टेक से फिजिकल केमिस्ट्री में पीएचडी की डिग्री ले चुके हैं। वह हार्वर्ड में एक पोस्ट डॉक्टरल फेलो और यूसी बर्कले में मिलर फेलो थे। इसके बाद वह यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस फैकल्टी में शामिल हो गए थे। वह मटीरियल्स रिसर्च लैब, डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स और बेकमैन इंस्टीट्यूट से जुड़े हुए हैं।

श्रीकांत नारायणन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से पीएचडी और एमएस की डिग्री प्राप्त की है।

श्रीकांत नारायणन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से पीएचडी और एमएस की डिग्री प्राप्त की है। इससे पहले उन्होंने चेन्नई में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया था। वह यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना के मिंग साई इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में सिग्नल एंड इमेज प्रोसेसिंग इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर भी हैं और कई सम्मान अर्जित कर चुके हैं।

मंजुल भार्गव प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में गणित के सबसे युवा पूर्व प्रोफेसर हैं। 

मंजुल भार्गव प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में गणित के सबसे युवा पूर्व प्रोफेसर हैं। उनका शोध नंबर थ्योरी और अंकों के अध्ययन व उनके संबंधों पर केंद्रित है। उन्होंने 2006 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री ली थी। नवंबर 2002 में भार्गव को 'पॉपुलर साइंस मैगजीन' ने 'ब्रिलियंट 10' में जगह दी थी। बता दें कि भार्गव ने नंबर थ्योरी में अमेरिकन मैथमैटिकल सोसायटी का कोल पुरस्कार जीता था।

सुपर्णा राजाराम ने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से एमए किया था। 

बेंगलुरु में माउंट कार्मेल कॉलेज से बीए करने वाली सुपर्णा राजाराम ने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से एमए किया था। इसके बाद उन्होंने परड्यू यूनिवर्सिटी से कॉग्निटिव साइकोलॉजी में एमएस और राइस यूनिवर्सिटी से इसी विषय में पीएचडी की थी। वह साल 1993 में स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर शामिल हुई थीं। 2003 में उन्हें पूर्ण प्रोफेसर बना दिया गया था।

ज्योति पुरी साइमन्स यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी की प्रोफेसर और लेखिका हैं।

ज्योति पुरी साइमन्स यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी की प्रोफेसर और लेखिका हैं। वह सामाजिक, यौन अध्ययनों, मृत्यु अध्ययनों और नारीवाद जैसे विषयों पर लिखती हैं। साल 2006 में उनकी किताब 'सेक्सुअल स्टेट्स: गवर्नेंस एंड द स्ट्रगल अगेंस्ट एंटीसोडोमी लॉ इन इंडियाज प्रेजेंट' को ड्यूक यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया था। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

मनीषा सिन्हा ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। 

मनीषा सिन्हा ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। यहां उनकी डिजर्टेशन को बैनक्रॉफ्ट पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। उन्होंने गुलामी व राजनीति को लेकर किताबें लिखी हैं। उनकी एक किताब 'द काउंटररिवॉल्यूशन ऑफ स्लेवरी: पॉलिटिक्स एंड आइडियोलॉजी इन एंटेबेलम साउथ कैरोलिना' को पॉलिटिको ने 2015 में गुलामी पर 10 सर्वश्रेष्ठ किताबों में शामिल किया था।