अमेरिका में अब पगड़ी पहनकर मोर्चे पर जा सकेंगे नौसेना के सिख अफसर

भारतीय प्रवासी के बेटे सुखबीर सिंह तूर ने इस अधिकार को हासिल करने के लिए संघर्ष किया है। पिछले साल जब वह पदोन्नति पाकर कैप्टन बने तो उन्होंने अपील का फैसला किया। उस समय तूर को कुछ सीमाओं के साथ सामान्य ड्यूटी के दौरान पगड़ी पहनने की अनुमति मिली थी।

अमेरिका में अब पगड़ी पहनकर मोर्चे पर जा सकेंगे नौसेना के सिख अफसर

लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार अमेरिकी नौसेना में 27 साल के एक सिख अफसर सुखबीर सिंह तूर को युद्ध क्षेत्र और किसी ऑपरेशन के दौरान भी पगड़ी पहनने और अपने धर्म के अनुसार दाढ़ी रखने की इजाजत दे दी गई है। अमेरिकी नौसेना के 247 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब वर्दी में किसी सिख अफसर को अपने धर्म के अनुसार आचरण करने की अनुमति दी गई है।

भारतीय प्रवासी के बेटे सुखबीर सिंह तूर ने इस अधिकार को हासिल करने के लिए संघर्ष किया।

वाशिंगटन और ओहायो में पले बढ़े भारतीय प्रवासी के बेटे सुखबीर सिंह तूर ने इस अधिकार को हासिल करने के लिए संघर्ष किया है। पिछले साल जब वह पदोन्नति पाकर कैप्टन बने तो उन्होंने अपील का फैसला किया। उस समय तूर को कुछ सीमाओं के साथ सामान्य ड्यूटी के दौरान पगड़ी पहनने की अनुमति मिली थी। लेकिन युद्ध क्षेत्र में तैनात होने के दौरान उन्हें इसकी अनुमति  नहीं थी।

नौसेना ने उन्हें या किसी अन्य सिख को युद्ध में तैनाती के दौरान दाढ़ी रखने की अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि दाढ़ी सैनिकों के काम करने की क्षमता में बाधा और जान जोखिम में डालती है। तूर ने नौसेना कोर कमांडेंट के प्रतिबंधात्मक निर्णय के खिलाफ अपील की। उनका कहना था कि अगर उन्हें सभी जगह पगड़ी पहनने की अनुमति नहीं मिलती है तो वह कोर के विरुद्ध मुकदमा करेंगे।

इसके बाद तूर और तीन अन्य सिखों ने कोलंबिया जिले के यूएस जिला अदालत में मुकदमा दायर करते हुए कहा कि नौसेना का धार्मिक छूट देने से इनकार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। यह उनके धर्म के स्वतंत्र अभ्यास के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है। तूर ने मुकदमा दायर करने से पहले कैलिफोर्निया में एक साक्षात्कार में कहा कि आखिरकार मुझे अपने विश्वास और अपने देश में किस को चुनने का अवसर नहीं आया। ऐसा कोई कारण नहीं है कि मुझे अपने देश की सेवा करने के लिए अपने विश्वास का त्याग करना पड़े। मैं जैसा हूं, वैसा ही रहते हुए दोनों का सम्मान करता हूं।

हर पक्ष को सुनने के बाद अदालत ने नौसेना के तमाम दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि टीम की एकता बाहरी अभिव्यक्ति से कहीं अधिक है। कोर्ट ने सुखबीर सहित अन्य को युद्ध क्षेत्र में तैनाती के दौरान पगड़ी पहनने, दाढ़ी रखने की इजाजत दे दी। लेफ्टिनेंट तूर ने साल 2017 में नौसेना में प्रवेश लिया था। तभी से उन्हें पगड़ी रखने को लेकर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इससे पहले अमेरिकी सेना और वायुसेना में दाढ़ी रखने और पगड़ी पहनने के लिए भी सिख समुदाय के सैनिक लड़ाई लड़ चुके हैं। लंबे संघर्ष के बाद उन्हें इसकी इजाजत मिली है।