श्रीलंका में जीवन रक्षक एम्बुलेंस, क्या है इसका पड़ोसी भारत से कनेक्शन

1990 सुवा सेरिया इमर्जेंसी एम्बुलेंस सर्विस अब श्रीलंका के सभी 25 जिलों में उपलब्ध है। 1990 एक टोल फ्री सर्विस है जिसपर कॉल करते ही 15 मिनट के अंदर एम्बुलेंस घर के दरवाजे पर खड़ी मिलती है। इस एम्बुलेंस सेवा ने कोविड-19 के दौरान श्रीलंका की बड़ी मदद की है।

श्रीलंका में जीवन रक्षक एम्बुलेंस, क्या है इसका पड़ोसी भारत से कनेक्शन
2016 से श्रीलंका में शुरू हुई थी यह परियोजना (फोटो : सुवा सेरिया ट्विटर)

भारत के श्रीलंका के साथ मछुआरों या फिर बंदरगाह को लेकर जो भी विवाद रहा हो, लेकिन नई दिल्ली ने कोलंबो को दी जाने वाली मदद के हाथ कभी पीछे नहीं खींचे। श्रीलंका की आर्थिक संकट की घड़ी में भारत लगातार अनाज और जरूरी दवाइयों की खेप भेज रहा है वहीं ऐसी कई परियोजनाएं वहां चल रही हैं, जो श्रीलंका वासियों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना रही हैं।

इन्हीं परियोजनाओं में एक है एम्बुलेंस सेवा, जिसने कोविड-19 के दौरान श्रीलंका की बड़ी मदद की है। भारतीय दूतावास के मुताबिक 1990 सुवा सेरिया इमर्जेंसी एम्बुलेंस सर्विस अब श्रीलंका के सभी 25 जिलों में उपलब्ध है। 1990 एक टोल फ्री सर्विस है जिस पर कॉल करते ही 15 मिनट के अंदर एम्बुलेंस घर के दरवाजे पर खड़ी मिलती है।

परियोजना की शुरुआत 2016 में हुई थी जब शुरुआती मदद के तौर पर 7.56 मिलियन डॉलर (करीब 57 करोड़ रुपये) की सहायता दी गई थी, जिस आर्थिक मदद  श्रीलंका ने टाटा मोटर्स से पश्चिमी और दक्षिणी प्रांतों के लिए 88 एम्बुलेंस खरीदी थीं। यह आवासीय परियोजना के बाद श्रीलंका में  भारत की दूसरी सबसे बड़ी परियोजना है।

मार्च में श्रीलंका दौरे पर एम्बुलेंस सेवा के मुख्यालय पहुंचे थे एस जयशंकर ( फोटो : सुवा सेरिया ट्विटर)

उधर, दूतावास का कहना है कि इस सेवा से अब तक 300 से अधिक एम्बुलेंस जोड़े गए हैं जो अब सभी 25 जिलों में उपलब्ध है। भारत ने इस परियोजना के लिए अब तक 22 मिलियन डॉलर (1.7अरब रुपये) से अधिक की मदद की है। भारत लगातार इस परियोजना की निगरानी भी कर रहा है। पिछले महीने अपने श्रीलंका दौरे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राजागिरिया स्थित 1990 सुवा सेरिया के मुख्यालय का दौरा किया था। परियोजना के शुभारंभ के वक्त जयशंकर भारत के विदेश सचिव थे और इस योजना को हकीकत में बदलने में उनकी बड़ी भूमिका रही है।

बता दें कि भारत इस वक्त श्रीलंका को मुश्किल से उबारने में अहम योगदान दे रहा है। अब तक  भारत ने हजारों मीट्रिक टन चावल, दवाइयां और ईंधन श्रीलंका को भेजे हैं। भारत में जहां खुद पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं फिर भी भारत ने बुधवार को 40,000 मीट्रिक टन डीजल की खेप जलमार्ग के जरिए श्रीलंका भेजी है। पिछले दो महीने में भारत ने 4 लाख मीट्रिक टन ईंधन श्रीलंका को मदद के तौर पर भेजा है।