डॉलर चढ़ा-रुपया गिरा, भारत में 'आशियाने' की तलाश में लग गए NRI

कोरोना महामारी के बाद मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे जैसे महानगरीय शहरों में प्रीमियम संपत्तियां, हिल स्टेशनों पर दर्शनीय स्थल और भारत के समुद्र तट की संपत्तियां अनिवासी भारतीयों को भी लुभाती हैं। रुपये का जब भी अवमूल्यन हुआ, अनिवासी भारतीय निवेश के रूप में भारत में घर खरीदना पसंद करते हैं।

डॉलर चढ़ा-रुपया गिरा, भारत में 'आशियाने' की तलाश में लग गए NRI

भू-राजनीतिक स्थिति और सख्त वैश्विक ब्याज दरों के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये के भाव में कमी आ गई है। 2022 में अब तक भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5.2 फीसदी तक गिर चुकी है। इसे देखते हुए अनिवासी भारतीय भारत में प्रॉपर्टी में निवेश को बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। घर खरीदने वाले एनआरआई की बढ़ती दिलचस्पी मध्यम आय प्रोजेक्ट्स से लेकर प्रीमियम और लग्जरी तक सभी सेगमेंट में देखी जा रही है।

ऐतिहासिक रूप से जब भी रुपये का अवमूल्यन हुआ है, अनिवासी भारतीयों ने निवेश के रूप में भारत में घर खरीदना पसंद किया है। Assotech Business Cresterra - Noida, India

रियल एस्टेट उद्योग निकाय नारेडको के उपाध्यक्ष और हीरानंदानी समूह के प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि दुनिया भर में आर्थिक हालात ने विभिन्न चुनौतियों को जन्म दिया है। लेकिन ऐसे हालात के बीच भी भारत आर्थिक विकास क्षमता के मामले में एक सुरक्षित आश्रय के रूप में दिख रहा है। ऐसे में भारतीय रियल एस्टेट भी एनआरआई के लिए पैसे कमाने का एक अच्छा विकल्प है। वैश्विक मुद्रा की स्थिति एनआरआई के लिए भारतीय अचल संपत्ति को खरीदने के लिहाज से अधिक वर्ग फुट में तब्दील हो जाती है। दुनिया में चल रहे अनिश्चित आर्थिक हालात के इस दौर में एक सुरक्षित आश्रय होने के अलावा भारतीय रियल एस्टेट किराये के रूप में भी आय प्रदान करता है। प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण ने भी निवेशकों के लिए एक एक बेहतर वातावरण बनाया है।

व्यापार का 30% से अधिक हिस्सा लंदन और माल्टा के अलावा इन देशों के अनिवासी भारतीयों से आया है। Assotech Business Cresterra - Noida, India

रहेजा कॉर्प होम्स के मुख्य कार्यकारी रमेश रंगनाथन का कहना है कि रुपये में गिरावट अनिवासी भारतीयों के लिए भारत में आवासीय अचल संपत्ति में निवेश करने का एक सुनहरा अवसर है। मध्य पूर्वी देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में भारतीयों की बड़ी आबादी रहती है। वे अपनी मुद्राओं को डॉलर से जोड़ते हैं। इसका मतलब है कि रुपये के मूल्य में आई कमी उनके लिए दुनिया के कई देशों में रहने वाले एनआरआई की तरह समान रूप से फायदेमंद है।

विशेष रूप से कोरोना महामारी के बाद भारत के मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और पुणे जैसे महानगरीय शहरों में प्रीमियम संपत्तियां, हिल स्टेशनों पर दर्शनीय स्थल और भारत भर के समुद्र तट, घरेलू खरीदारों के अलावा अनिवासी भारतीयों को भी लुभा रही हैं। लग्जरी हॉलिडे होम डेवलपर इस्प्रवा ग्रुप के संस्थापक और सीईओ धीमान शाह का कहना है कि प्रॉपर्टी खरीदने को लेकर हम खाड़ी देशों में रहने वाले अनिवासी भारतीयों में बहुत अधिक रुचि देख रहे हैं। इसके अलावा, हम सिंगापुर और हांगकांग से भी मजबूत मांग देख रहे हैं। इस साल अब तक हमारे व्यापार का 30% से अधिक हिस्सा लंदन और माल्टा के अलावा इन देशों के अनिवासी भारतीयों से आया है।

दरअसल ऐतिहासिक रूप से जब भी रुपये का अवमूल्यन हुआ है, अनिवासी भारतीयों ने निवेश के रूप में भारत में घर खरीदना पसंद किया है। विशेष रूप से खाड़ी में उन लोगों द्वारा जो सेवानिवृत्ति के बाद अपने देश लौटने की योजना बना रहे हैं, वे घर खरीदने में रुचि दिखाते हैं।

सभी फोटो: राजीव भट्ट