बड़ी बात: भारत की छह फिल्में होंगी कान महोत्सव का हिस्सा, जानें इनको

कान फिल्म महोत्सव 2022 में अलग-अलग भाषाओं की छह फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें से कुछ फिल्में भारत में रिलीज हो चुकी हैं और कुछ रिलीज होनी बाकी हैं। कान से भारत के लिए दूसरी खुशखबरी यह है कि एक्ट्रेस पादुकोण इस साल जूरी का हिस्सा होंगी।

बड़ी बात: भारत की छह फिल्में होंगी कान महोत्सव का हिस्सा, जानें इनको

कान फिल्म महोत्सव में इस बार भारत की छह फिल्मों को जगह मिली है। इनमें रॉकेट्री- द नाम्बी इफेक्ट, गोदावरी, अल्फा बीटा गामा, बूम्बा राइड, धुइन और ट्री फुल ऑफ पैरोट शामिल हैं। भारत के लिए एक खुशखबरी यह भी है कि कान की 8 सदस्यीय जूरी में इस बार बॉलीवुड स्टार दीपिका पादुकोण भी नजर आएंगी। यह महोत्सव 17 मई से शुरू होगा। अब कान में प्रदर्शित होने वाली इन फिल्मों की कहानी पर रोशनी डालते हैं।

रॉकेट्री - द नाम्बी इफैक्ट

एक्टर आर माधवन द्वारा निर्देशित यह फिल्म इसरो के साइंटिस्ट नाम्बी नारायण की जिंदगी पर आधारित है। यह एक देशभक्त वैज्ञानिक की कहानी है जो अपने देश की सेवा के लिए नासा तक के ऑफर को ठुकरा देता है लेकिन एक दिन  भ्रष्टाचार के झूठे आरोप में फंस जाता है। माधवन ने फिल्म में नाम्बी की जवानी से लेकर बुढ़ापे तक का रोल खुद निभाया है। फिल्म में बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान और दक्षिण के एक्टर सूर्या का गेस्ट अपीयरेंस है। फिल्म हिंदी, अंग्रेजी और तमिल में बनाई गई है लेकिन इसका प्रदर्शन कान में अंग्रेजी में किया जाएगा।

गोदावरी का निर्देशन निखिल महाजन ने किया है।

गोदावारी

मराठी भाषा में बनाई गई फिल्म में निशिकांत देशमुख की कहानी है जो अपने परिवार के साथ नदी के किनारे एक बड़े से मकान में रहते हैं। एक समय में वह शहर में बड़े जायदाद के मालिक बन जाते हैं। हालांकि धीरे-धीरे उनके परिवार का पतन होना शुरू हो जाता है और निशिकांत निराशा से घिरने लग जाते हैं। वह अपनी जिंदगी और अपने शहर से नफरत करने लगते हैं। यह फिल्म निशिकांत की जिंदगी की उधेड़बुन को दर्शाती है। इसका निर्देशन निखिल महाजन ने किया है।

अल्फा बीटा गामा

निर्देशक शंकर श्रीकुमार ने कोरोना के समय के संघर्ष को पर्दे पर उतारा है। हिंदी भाषा में बनी यह फिल्म कोविड के समय की वैवाहिक जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के मुख्य पात्र यानी पति-पत्नी एक दूसरे अलग होना चाहते हैं लेकिन इससे पहले कि वे कोई फैसला कर पाएं देश में लॉकडाउन लग जाता है। उन्हें न चाहते हुए भी एक दूसरे के साथ रहना पड़ता है।

'बूम्बा राइड' ग्रामीण शिक्षा पर आधारित है।

बूम्बा राइड

विश्वजीत बोरा निर्देशित बूम्बा राइड गांव के शिक्षा व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार की कहानी है, जिसे व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सच्ची घटना पर आधारित यह फिल्म को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे फिल्माया गया है। यह कहानी गांव के एक स्कूल पर आधारित है, जिसमें केवल एक ही बच्चा बूम्बा पढ़ने आता है। अपनी नौकरी बचाने के लिए टीचर किस तरह इस बच्चे को स्कूल लाने के लिए उसे रिश्वत देते हैं इसे बड़े ही खूबसूरती और हास्य के साथ पेश किया गया है।

धुइन

हिंदी और मराठी में बनाई गई इस फिल्म में पंकज नाम के एक युवक की कहानी है जो एक्टर बनना चाहता है। अपना सपना पूरा करने के लिए अपने इलाके में नाटक का मंचन करता है। वह किसी तरह जुगाड़ करके मुंबई पहुंचता है लेकिन जैसे ही वह मुंबई के एक फिल्मकार से मिलता है उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है और फिर वह लौटकर घर चला आता है। फिल्म का निर्देशन अचल मिश्रा ने किया है।