अकेले सितंबर में भारतीयों ने विदेश भेजे 15,000 करोड़ रुपये, ऐसा क्या हो गया!

लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत बाहर भेजी गई धनराशि का प्रतिशत इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच 56 फीसदी बढ़कर 8.9 अरब डॉलर (लगभग 67,000 करोड़ रुपये) हो गया, जो ठीक एक साल पहले इसी अवधि में 5.7 अरब डॉलर (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) था।

अकेले सितंबर में भारतीयों ने विदेश भेजे 15,000 करोड़ रुपये, ऐसा क्या हो गया!
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भारत में कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के साथ ही भारतीयों में विदेशी यात्रा और उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए विदेश जाने में तेजी देखने को मिली है। आंकड़े बताते हैं कि इस साल ​जितना पैसा भारतीयों ने विदेश में यात्रा और शिक्षा के लिए खर्च किया है, उतना पैसा पिछले तीन साल में खर्च नहीं हुआ।

During our road trip on highway 66 we stopped at a local shop and I spotted in a dark corner this old map with pins and currencies left by visitors from all over the planet.
वित्त वर्ष 21-22 की पहली छमाही में यात्रा खर्च 1.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2.4 अरब डॉलर हो गया जबकि विदेश में पढ़ाई के लिए प्रेषण 1.5 अरब डॉलर से बढ़कर 3 अरब डॉलर हो गया। Photo by Christine Roy / Unsplash

मिली जानकारी के अनुसार लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत भारतीयों ने सितंबर में करीब 2 बिलियन डॉलर (लगभग 15,000 करोड़ रुपये) विदेश भेजे हैं। यह आंकड़ा तीन साल में सबसे अधिक है। भारत के रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि 60 फीसदी से ज्यादा पैसा विदेशी यात्रा और विदेशों में पढ़ाई के लिए भेजा गया है और यह कई साल के उच्चतम स्तर पर है।

लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत बाहर भेजी गई धनराशि का प्रतिशत इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच 56 फीसदी बढ़कर 8.9 अरब डॉलर (लगभग 67,000 करोड़ रुपये) हो गया, जो ठीक एक साल पहले इसी अवधि में 5.7 अरब डॉलर (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) था। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के जरिए भारतीय रिजर्व बैंक  विदेशी यात्रा, विदेश में पढ़ाई, करीबी रिश्तेदारों के रखरखाव, उपहार सहित कई चालू खातों में लेनदेन के लिए भारतीयों को प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 2,50,000 डॉलर (लगभग 2 करोड़ रुपये) तक विदेश भेजने की अनुमति देता है। पूंजी खाता लेनदेन जैसे जमा, इक्विटी और बांड में निवेश के अलावा संपत्ति की खरीद भी एलआरएस के अंतर्गत आती है।