यूएन में भारत ने कहा- हिंदू भी हो रहे हैं हिंसक धार्मिक भेदभाव का शिकार

तिरुमूर्ति ने कहा कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने अपने तरीके बदल लिए हैं और उसका मुख्य रूप से ध्यान सीरिया और इराक में फिर से जमीन मजबूत करने पर है। इसके क्षेत्रीय सहयोगी संगठन विशेष रूप से अफ्रीका और एशिया में अपना विस्तार कर रहे हैं।

यूएन में भारत ने कहा- हिंदू भी हो रहे हैं हिंसक धार्मिक भेदभाव का शिकार

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने दो टूक लहजे में कहा कि धार्मिक आधार पर नफरत और उससे जुड़ी हिंसा में अब ‘हिंदूफोबिया’ को भी शामिल किया जाए। सिख और बौद्ध धर्म अनुयायियों की ही तर्ज पर हिंदुओं को भी हिंसक धार्मिक भेदभाव का शिकार बनना पड़ रहा है। वैश्विक आतंकवाद रोधी परिषद द्वारा ‘आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2022’ में तिरुमूर्ति ने यह बात रखी। तिरूमूर्ति यूएनएससी की आतंकवाद निरोधक कार्रवाई समिति के 2022 के लिए अध्यक्ष भी हैं।

उन्होंने अपने राजनीतिक, धार्मिक एवं अन्य मकसदों के चलते आतंकवाद का वर्गीकरण करने की संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्यों की प्रवृत्ति को खतरनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि बीते साल वैश्विक आतंकरोधी रणनीति में कई गंभीर खामियां और चूक हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत के ऐतराज को जाहिर करते हुए कहा कि हिंसक राष्ट्रवाद या दक्षिणपंथी अतिवादी जैसे शब्दों को आतंकवाद की बदलती परिभाषा के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।