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उद्यमी वर्मा ने क्यों छोड़ी लॉस एंजिल्स के मेयर चुनाव की उम्मीदवारी, बताते हैं

रमित वर्मा निर्दलीय रूप से मेयर के चुनाव के लिए खड़े हुए थे। उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं था। वर्मा साल 2000 में एमबीए की पढ़ाई के लिए लॉस एंजिल्स आ गए थे। उन्होंने बच्चों और युवा वयस्कों को जीवन में सफल होने के अधिक अवसर देने के लिए शुरू में ही इस कंपनी का निर्माण किया।

लॉस एंजिल्स में मेयर का चुनाव लड़ने की चाह रखने वाले भारतीय मूल के उद्यमी रमित वर्मा ने खुद दौड़ से बाहर निकलते हुए अन्य उम्मीदवार रिक कारुसो को समर्थन करने का फैसला किया है।

अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक पत्र में वर्मा ने लिखा है कि ये जरूर है कि उनकी और कारुसो की पृष्ठभूमि और अनुभव बहुत अलग हैं लेकिन फिर भी उन्होंने पाया कि दोनों एक उद्देश्य के लिख खड़े हुए। लॉस एंजिल्स को सुरक्षित, किफायती और स्वच्छ बनाने की इच्छा दोनों ने की है। एक ऐसा शहर जहां हमारे बच्चे और आने वाले पीढ़ियों को दशकों तक गर्व महसूस हो।

साल 2002 की शुरुआत के बाद से ही वर्मा ने सांता मोनिका में अपनी कंपनी का मुख्यालय बनाया।

बता दें कि रमित वर्मा निर्दलीय रूप से मेयर के चुनाव के लिए खड़े हुए थे। उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं था। वर्मा साल 2000 में एमबीए की पढ़ाई के लिए लॉस एंजिल्स आ गए थे। वर्मा बताते हैं कि वह लॉस एंजिल्स से पल भर में प्यार कर बैठे। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म रिवॉल्यूशन प्रेप की सह-स्थापना की।

उन्होंने बच्चों और युवा वयस्कों को जीवन में सफल होने के अधिक अवसर देने के लिए शुरू में ही इस कंपनी का निर्माण किया। साल 2002 की शुरुआत के बाद से ही वर्मा ने सांता मोनिका में अपनी कंपनी का मुख्यालय बनाया। रिवॉल्यूशन प्रेप कुछ ही समय बाद लॉस एंजिल्स की सबसे तेजी से बढ़ती शिक्षा से जुड़ी कंपनी बन गई जो एसएटी, एसीटी और पीएसएटी एग्जाम की तैयारी कराती थी।

मेयर के चुनाव में बास और कारुसो मेयर एरिक गार्सेटी को बदलने की दौड़ में सबसे आगे हैं। दौड़ में अभी भी अन्य उम्मीदवारों में काउंसिल मेंबर केविन डी लियोन, कार्यकर्ता जीना वियोला, पूर्व मेट्रो बोर्ड के सदस्य मेल विल्सन और पूर्व जनसंपर्क कार्यकारी क्रेग ग्रीवे भी शामिल हैं। वर्तमान मेयर एरिक गार्सेटी ने 2017 के मार्च में साढ़े पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से चुनाव जीता था।

पिछले साल जुलाई में राष्ट्रपति बाइडेन ने गार्सेटी को भारत में राजदूत के रूप में नामित किया था। हालांकि उनकी पुष्टि शुरुआत से ही संदिग्ध रही। 12 जनवरी को सीनेट की विदेश संबंध समिति ने गार्सेटी के नामांकन को मंजूरी दी लेकिन पूरी सीनेट द्वारा पुष्टि अभी भी बाकी है। राष्ट्रपति बाइडेन की पसंद को न केवल जीओपी से बल्कि कुछ डेमोक्रेट्स के प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ा है।

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