पश्चिम के लिए दक्षिण-एशियाई लोगों का कठिन सफर

बंगाली हार्लेम, एमआईटी विद्वान विवेक बाल्ड की एक किताब है और इस पर डाक्यूमेंट्री भी आने वाली है जो उन दक्षिण एशियाई लोगों की कहानियों को बताती है जो 1880 से 1950 के दशक के बीच अमेरिका गए थे।

पश्चिम के लिए दक्षिण-एशियाई लोगों का कठिन सफर

एक गैर-सरकारी संगठन 'डेसिस फॉर प्रोग्रेस' ने हाल ही में 'बंगाली हार्लेम एंड द लॉस्ट हिस्ट्रीज़ ऑफ साउथ एशियन अमेरिका' पुस्तक के लेखक विवेक बाल्ड के साथ इमिग्रेंट हैरिटेज मंथ को सेलिब्रेट किया।

डेसिस फॉर प्रोग्रेस के बोर्ड की सदस्य ज्योत्सना धर की इंट्रोडक्ट्री स्पीच के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

वाशिंगटन डीसी में स्थित यह संगठन लोगों और नीतियों का समर्थन करके और अमेरिका में दक्षिण एशियाई प्रवासियों की परंपरा से हटकर कहानियों को सामने लाकर दक्षिण एशियाई लोगों के एक मजबूत समुदाय का निर्माण करने के लिए काम करता है।

इस कार्यक्रम में दक्षिण एशियाई प्रवासियों के साथ जश्न मनाया गया। एक MIT स्कॉलर बाल्ड ने अपनी स्पीच की शुरुआत अलाउद्दीन उल्लाह से मुलाकात के जिक्र से की। उन्होंने उल्लाह के साथ अपने अनुभवों को शेयर किया। वह 1990 के दशक के अंत में उनकी मदद से अपने पिता की एक डॉक्यूमेंटरी बनाना चाहते थे। इसमें वह दिखाना चाहते थे कि कैसे उनका जीवन इतिहास से आगे बढ़ा।