प्रवासी भारतीय के अंगदान से तीन की जान बची, अब पत्नी को मदद की दरकार

गुजरात की खुशबूबेन चितानिया भारत वापस जाना चाहती हैं, लेकिन वह ऐसा तब तक नहीं कर सकतीं जब तक कि करीब 40 लाख रुपये बकाया चुका नहीं देती।

प्रवासी भारतीय के अंगदान से तीन की जान बची, अब पत्नी को मदद की दरकार

दुबई में अंगदान कर तीन लोगों की जान बचाने वाले की 45 वर्षीय विधवा अपने किराये के बकाए को चुकाने और भारत वापस लौटने के लिए बेताब है लेकिन वह बिना मदद के बकाया नहीं चुका सकती क्योंकि यह बहुत बड़ी राशि है। गुजरात की खुशबूबेन नीलेशकुमार चितानिया भारत वापस जाना चाहती हैं, लेकिन वह ऐसा तब तक नहीं कर सकतीं जब तक कि वह अपने पति द्वारा उनके नाम पर किराए पर लिए गए अपार्टमेंट और दुकान के किराए का भुगतान नहीं कर देतीं। यह राशि 200,000 दिरहम (लगभग 40 लाख रुपये) है।

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पति के निधन के बाद खुशबूबेन के सामने 200,000 दिरहम (लगभग 40 लाख रुपये) की देनदारी है।

खुशबूबेन के पति नीलेशकुमार चितानिया (55), एसी तकनीशियन थे और बुर दुबई में एक छोटी सी दुकान चलाते थे। उन्हें 11 जुलाई को गंभीर ब्रेन स्ट्रोक का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें दुबई के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया।

चितनिया शाम की सैर के बाद घर लौट रहे थे, तभी वह बिल्डिंग की पार्किंग में गिर पड़े। एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें देखा जिसने चौकीदार को सूचना दी। चौकीदार ने खुशबूबेन से संपर्क किया। उन्हें तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल के एमरजेंसी में ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने कहा कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ है। वह कोमा में थे और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। 17 जुलाई को चितानिया का निधन हो गया, लेकिन उन्होंने अपने महत्वपूर्ण अंगों को दान करके तीन अन्य लोगों की जान बचाई।