शख्सियत: गंगा में पिता की अस्थियां विसर्जित करने पहुंचे प्रविंद, नहीं भूल पाएंगे भारत को

मॉरीसस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ का भारत से गहरा नाता है। वह हिंदू धर्म को मानने वाले और हिंदी के प्रबल समर्थक हैं। वह हिंदू को वैश्विक भाषा के तौर पर उभरता हुआ देखना चाहते हैं। भारत और हिंदी प्रेम के कारण पहले प्रवासी भारतीय सम्मान और पद्म विभूषण से भी नवाजा गया था।

शख्सियत: गंगा में पिता की अस्थियां विसर्जित करने पहुंचे प्रविंद, नहीं भूल पाएंगे भारत को
भारत दौरे पर पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मॉरीसस के पीएम प्रबिंद जगन्नाथ (फोटो : ट्विटर) 

अपनी माटी से दूर दूसरे देशों में अपने वतन का नाम रोशन कर रहे भारतवंशियों के बारे में आप कितना जानते हैं? जब आपसे यह सवाल पूछा जाता होगा तो आपके जहन में कई नाम आ जाते होंगे। आज 3 करोड़ से अधिक भारतवंशी विभिन्न देशों में निवास करते हैं और इनमें से कई उन देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, सांसद, राजदूत और जज सहित प्रमुख पदों पर आसीन हैं। हम अपनी इस कड़ी में ऐसे ही विशेष लोगों की कहानी आप तक लेकर आएंगे जिन्होंने मिट्टी से दूर रहकर अपनी अलग पहचान बनाई है लेकिन भारत से नाता नहीं तोड़ा। इसकी शुरुआत मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ से हो रही है...

61 वर्षीय प्रविंद जगन्नाथ पूर्व पीएम अनिरुद्ध जगन्नाथ के बेटे हैं। दूसरे देशों में जन्म लेने वाले कई ऐसे प्रवासी भारतीय हैं, जिनका संबंध भारत से केवल आनुवांशिकी तक ही है और वे भारत के बारे में या तो बहुत कम जानते हैं या संबंध उतने गहरे नहीं हैं। लेकिन प्रविंद का जन्म मॉरीशस के फीनिक्स में भले हुआ हो लेकिन उनका दिल भारत के लिए धड़कता है और पिछली बार उन्होंने भारत दौरे पर कहा था कि वह भी नए भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनना चाहते हैं।

ग्लोबल आयुष इन्वेस्टमेंट एंड इनोवेशन समिट में पहुंच पीएम प्रबिंद

प्रविंद का राजनीतिक सफर, शिक्षा

बात प्रविंद जगन्नाथ के राजनीतिक करियर की करते हैं। चूंकि प्रविंद के पिता राजनीति में सक्रिय थे इसलिए उनका राजनीति में रुझान लाजमी था। देश के औद्योगिक विकास में प्रविंद के पिता अनिरुद्ध जगन्नाथ की अहम भूमिका रही है। वहीं, राजनीतिक हलकों में प्रविंद को लेकर चर्चा तो 1987 से ही शुरू हो गई थी लेकिन उन्होंने औपचारिक रूप से पिता की पार्टी एमएसएम को 1990 में जॉइन किया और कार्यकर्ता के तौर पर काम करते रहे। जबकि सही मायने में एक राजनीतिक हस्ती के तौर पर तब उभरे जब उन्हें 2000 कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2017 में पीएम बनने से पहले उन्होंने संसद में विपक्ष से लेकर कई मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी संभाली है।

मॉरीशस के मंदिर उद्घाटन में पहुंचे प्रबिंद

विदेश में जन्मे पर नहीं भूले भारत के संस्कार

मॉरीशस की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी हिंदुओं की है और प्रबिंद का परिवार भी उनमें से एक है। उनके परिवार का यूपी के बलिया से नाता है और वर्षों पहले वे मॉरीशस जा बसे थे लेकिन प्रबिंद के पिता ने भारत के संस्कार को अपने अंदर न केवल जीवित रखा बल्कि उन्हीं संस्कारों से अगली पीढ़ी का पालन-पोषण किया। अब प्रबिंद भी इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

मॉरीशस के पीएम जगन्नाथ भी हिंदू रीति-रिवाजों को मानने वाले हैं। हिंदू धर्म के प्रति उनकी आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने पिता अनिरुद्ध जगन्नाथ की अस्थियों का विसर्जन करने इन दिनों भारत की धार्मिक नगरी काशी पहुंचे हैं। उनके पिता का पिछले वर्ष ही निधन हो गया था लेकिन कोविड के कारण वह अस्थियां लेकर भारत नहीं आ पाए थे। हिंदू धर्म में गहरी आस्था रखने वाले प्रविंद ने एक साल तक इंतजार किया और गुरुवार को काशी पहुंचकर पिता की मोक्ष प्राप्ति की कामना की। प्रबिंद धार्मिक अनुष्ठानों में भी आए दिन हिस्सा लेते हैं। मॉरीशस में हाल ही में बृहद पुरोहित संघ द्वारा बनाए गए मुक्तेश्वर मंदिर के उद्घाटन के लिए पहुंचे।

हिंदी को वैश्विक भाषा बनाना चाहते हैं प्रविंद

पिता अनिरुद्ध जगन्नाथ की तरह ही प्रविंद को भी हिंदी से खासा लगाव है। 2019 में जब पीएम प्रविंद प्रवासी भारतीय दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे थे तो उन्होंने हिंदी में भाषण दिया था और कहा था कि भारतीय संस्कृति की आत्मा हिंदी में बसती है और इस संस्कृति बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रवासी भारतीयों की भी है। उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने की वकालत की थी। बता दें कि अनिरुद्ध जगन्नाथ ऐसी शख्सियत थे जिन्हें भारत और हिंदी प्रेम के कारण पहले प्रवासी भारतीय सम्मान और पद्म विभूषण से भी नवाजा गया था।