इस देश में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की बदहाली का सबूत है यह प्राचीन गुरुद्वारा

बाइस साल पहले साल 2000 सिखों के कड़े विरोध के बावजूद प्रदेश सरकार ने इसे म्यूनिसिपल लाइब्रेरी में बदल दिया था। इससे पहले 1976 में इस गुरुद्वारे को पुलिस विभाग के हवाले कर दिया गया था। इस पर 1999 से मनशेहरा के ‘टाउन म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन’ (टीएमए) का कब्जा है।

इस देश में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की बदहाली का सबूत है यह प्राचीन गुरुद्वारा
Photo by Ali Rizvi / Unsplash

पाकिस्तान स्थित करीब 100 साल पुराने श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा इस देश में अल्पसंख्यकों की बदहाली का जीता-जागता सबूत है। यह गुरुद्वारा खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के मनशेहरा जिले में स्थित है। गुरुद्वारे पर सरकार का नियंत्रण है। बरसों पहले गुरुद्वारे को लाइब्रेरी में तब्दील कर दिया गया था। परिसर में पुलिस थाना बना दिया गया है। सिख संगठन इसके खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। अब पाकिस्तानी अधिकारियों ने गुरुद्वारे के उचित रखरखाव व संरक्षण के लिए उसे एवेक्यू प्रॉपर्टी ट्रस्ट बोर्ड (ईपीटीबी) को सौंपने के बारे में फैसला लेने के लिए एक संयुक्त समिति बनाई है। अधिकारियों ने बताया कि समिति अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे का दौरा करेगी।

आरोप लग रहे हैं कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों के धार्मिक स्थलों को मिटाने का किस तरह से प्रयास किया गया, इसका जीता-जागता उदाहरण यह गुरुद्वारा भी है। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में बने श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे को वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट कृति के रूप में जाना जाता है। सिख संत सरदार गोपाल सिंह सैथी ने साल 1905 में इस गुरुद्वारे की नींव रखी थी। ईपीटीबी के अध्यक्ष आमेर अहमद का कहना है कि भारत विभाजन के बाद इस गुरुद्वारा साहिब को बंद कर दिया गया था।