पैरेंट्स के साथ कम उम्र में अमेरिका जाने वाले हजारों भारतीय बच्चों पर डिपोर्टेशन का संकट

इंप्रूव द ड्रीम से जुड़ी लक्ष्मी पार्वतीनाथन को राष्ट्रपति जो बाइडेन से बातचीत के बाद उम्मीद है कि इमिग्रेशन कानून में बदलाव आएगा।

पैरेंट्स के साथ कम उम्र में अमेरिका जाने वाले हजारों भारतीय बच्चों पर डिपोर्टेशन का संकट
राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ लक्ष्मी पार्वतीनाथन। (साभार: Twitter/@Lakshmi_par)

यूएस इमिग्रेशन सिस्टम को 2 लाख से अधिक ऐसे डॉक्यूमेंटेड ड्रीमर्स की जानकारी है, जो डिपोर्टेशन (निर्वासन) के खतरे का सामना कर रहे हैं। इनमें से करीब 70% भारतीय परिवारों के बच्चे हैं।

डॉक्यूमेंटेड ड्रीमर्स उन बच्चों को कहा जाता है, जो अपने पैरेंट्स (नॉन-इमिग्रेंट वीजा होल्डर्स जैसे- H-1B) के साथ नाबालिग के रूप में अमेरिका आते हैं।

जब ये बच्चे 21 साल के हो जाते हैं, तो ये H-4 डिपेंडेंट वीजा (H-4 dependent visa) के साथ अमेरिका में नहीं रह सकते। आसान भाषा में कहें तो 21 साल की उम्र के बाद इन्हें या तो विदेशी छात्रों के लिए जारी होने वाला F-1 वीजा के लिए ट्रांजिट करना होगा या उन्हें अपने देश वापस लौटना होगा।

'इंप्रूव द ड्रीम' के संस्थापक दीप पटेल के सतत अभियान और अनुरोध के बाद कांग्रेसवूमेन डेबोरा रॉस, रैप मैरीनेट मिलर मीक्स और रैप किम यंग ने अमेरिका चिल्ड्रेन एक्ट (America’s Children Act) पेश किया है, जो वर्तमान के इमिग्रेशन कानूनों को तोड़कर ऐसे बच्चों को कानूनी परमानेंट रेजिडेंस का वादा करेगा।

इस एक्ट के इंप्लीमेंटेशन पर अभी काम चल रहा है और यह एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है। अमेरिका में रहने वाले तमाम डॉक्यूमेंटेड ड्रीमर्स को जीविकोपार्जन के लिए एच 1-बी लॉटरी (H1-B lottery) जीतने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। बढ़ती संख्या की वजह से उनके लिए संभावनाएं कम हो जाती हैं।

इंडियन स्टार ने बेहतर जानकारी के लिए 'इंप्रूव द ड्रीम' से जुड़े दो डॉक्यूमेंटेड ड्रीमर्स परीन महात्रे, संचार प्रबंधक और लक्ष्मी पार्वतीनाथन, संचालन प्रबंधक का इंटरव्यू लिया।