'भारत में बच्चे ज्यादा पढ़ें', चाहता है यह संगठन

भारत में सर्वेक्षण में शामिल 78 फीसदी माता-पिता ने कहा है कि वह पढ़ने से उनके बच्चे ज्यादा बेहतर तरीके से कनेक्ट होते हैं। वहीं 83 फीसदी का मानना है कि उनके पास अपने बच्चे को पढ़ने के लिए अधिक समय होना चाहिए।

'भारत में बच्चे ज्यादा पढ़ें', चाहता है यह संगठन
अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा बनना है।

70 भाषाओं और 190 देशों में दुनिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालय प्रेस प्रकाशन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP) ने बच्चों में पढ़ने को प्रोत्साहित करने के लिए भारत में एक अभियान शुरू किया है। OUP इंडिया के अनुसार REaD कैंपेन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को एक समुदाय के रूप में एक साथ आने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है ताकि बच्चों को पढ़ने और विकसित करने में मदद मिल सके।

OUP का कहना है कि एक नए अध्ययन के अनुसार भारत में कई माता-पिता अपने बच्चों की किताबें पढ़ना पसंद करते हैं जिन्हें वे अपने बचपन में पसंद करते थे। OUP इंडिया के प्रबंध निदेशक सुमंत दत्ता ने बताया कि REaD कैंपेन का मुख्य उद्देश्य युवा पाठकों का समर्थन और प्रोत्साहित करने वाला एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। हमारी दृष्टि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा बनना है और छात्रों को पढ़ने के प्रति ज्यादा बेहतर बनाना है ताकि वे गुणवत्ता सामग्री को पढ़ने के प्रति प्रेरित हो सकें और 21वीं सदी में आजीवन पढ़ने के प्रति ज्यादा रुचिकर बन सकें।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, भारत के प्रबंध निदेशक सुमंत दत्ता (Source : OUP)

प्रबंध निदेशक सुमंत दत्ता के अनुसार महामारी के परिणाम स्वरूप अपेक्षित पढ़ने के स्तर में अंतर व्यापक हो गया है। हम OUP में अपने उत्पादों और किताबों के शीर्षक के माध्यम से माता-पिता, शिक्षकों और बच्चों की सहायता करने, चुनौतियों से पार पाने और पढ़ने के लिए एक अंतर्निहित प्रेम पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत में सर्वेक्षण में शामिल 78 फीसदी माता-पिता ने कहा है कि पढ़ने से उनके बच्चे ज्यादा बेहतर तरीके से कनेक्ट होते हैं। वहीं 83 फीसदी का मानना है कि उनके पास अपने बच्चे को पढ़ने के लिए अधिक समय होना चाहिए। OUP इंडिया ने पढ़ने के महत्व पर शिक्षाविदों, प्रकाशकों, एनिमेटरों और लेखकों के साथ एक पैनल चर्चा आयोजित भी की थी। भारत और यूके के इन पैनलिस्टों ने कम उम्र में पढ़ने की आदतों को विकसित करने के महत्व के साथ-साथ छात्रों को उत्साही पाठकों के रूप में विकसित करने के लिए सुझावों पर अपने विचार साझा किए थे।

इस चर्चा में भाग लेने वालों में सीबीएसई निदेशक (कौशल शिक्षा और प्रशिक्षण) बिस्वजीत साहा, OUP यूके में निदेशक (प्राथमिक साक्षरता) एंड्रिया क्विंसी और OUP़ इंडिया में सहयोगी निदेशक (उत्पाद) मल्लिका घोष शामिल थे।