भारतीय शख्स पर आव्रजन दस्तावेजों में धोखाधड़ी और पहचान छिपाने का आरोप

रोहित कुमार ने H-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत भारतीय नागरिक कामगारों को अमेरिका लाने और फिर न्यूजर्सी की कंपनी में काम की व्यवस्था करने में मदद की थी। कुमार ने दुनिया की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों में से एक के लिए भारत में कई साल तक काम किया है।

भारतीय शख्स पर आव्रजन दस्तावेजों में धोखाधड़ी और पहचान छिपाने का आरोप

अमेरिका में एक भारतीय नागरिक के खिलाफ आव्रजन दस्तावेजों में धोखाधड़ी और पहचान छिपाने का आरोप लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के रोहित कुमार (30) पर फर्जी आव्रजन दस्तावेज जमा करने और पहचान छिपाने के छह-छह आरोप लगाए गए हैं।

यह जानकारी अधिवक्ता फिलिप सेलिंगर ने गुरुवार को दी। मामले में दायर दस्तावेजों और अदालती बयानों के अनुसार रोहित कुमार ने दुनिया की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों में से एक के लिए भारत में कई साल तक काम किया है। दस्तावेजों के मुताबिक इस आईटी कंपनी ने एक इलेक्ट्रिक यूटिलिटी कंपनी के साथ अनुबंध किया था जो न्यूजर्सी में थी।

अमेरिका में आव्रजन दस्तावेज से संबंधित धोखाधड़ी के हर अपराध के लिए 10 साल तक के कारावास और अधिकतम 2.5 लाख डॉलर (1.94 करोड़ रुपये) के जुर्माने का प्रावधान है।

यह कंपनी दक्षिणी न्यू जर्सी समेत कई स्थानों पर परमाणु ऊर्जा केंद्रों का संचालन करती थी। अनुबंध के तहत आईटी कंपनी ने न्यू जर्सी की कंपनी को सेवाएं दी थीं। जानकारी के अनुसार इन सेवाओं में व्यवसायों में काम करने वाले भारत से विदेशी नागरिक कामगारों की भर्ती और आपूर्ति का काम भी शामिल था।

रोहित कुमार ने H-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत भारतीय नागरिक कामगारों को अमेरिका लाने और फिर न्यूजर्सी की कंपनी में काम की व्यवस्था करने में मदद की थी। इनमें से कुछ दक्षिणी न्यूजर्सी में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र में जबकि अन्य कर्मी न्यूजर्सी में और उसके आसपास के स्थानों पर तैनात थे।

अमेरिका में आव्रजन दस्तावेज से संबंधित धोखाधड़ी के हर अपराध के लिए 10 साल तक के कारावास और अधिकतम 2.5 लाख डॉलर (1.94 करोड़ रुपये) के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं पहचान छिपाने के हर मामले में दो साल कारावास और अधिकतम 2.5 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।