भारत में केवल 5 फीसदी महिलाएं शीर्ष प्रबंधन में, जबकि 7 फीसदी बड़ी अधिकारी

पेप्सिको की पूर्व चेयरपर्सन इंद्रा नूयी ने आईआईएम के छात्रों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि हमें बदलाव देखने के लिए सबसे पहले संगठनों में महिलाओं की एक बड़ी संख्या की जरूरत है। एक बार हमारे पास दिखाने के लिए एक ट्रैक रिकॉर्ड बन जाए तो भविष्य में पुरुष या महिला होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

भारत में केवल 5 फीसदी महिलाएं शीर्ष प्रबंधन में, जबकि 7 फीसदी बड़ी अधिकारी

जब भी भारत के कॉरपोरेट क्षेत्र के बोर्डरूम की बात आती है तो शीर्ष पर केवल कुछ महिलाएं दिखाई देती हैं। पुरुषों को वर्चस्व ज्यादा देखने को मिलता है। यह हकीकत इस बात से भी जाहिर होती है कि आईआईएम अहमदाबाद द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि केवल 5 फीसदी महिलाएं ही शीर्ष प्रबंधन में अपनी जगह बनाए हुए हैं, जबकि 7 फीसदी महिलाएं वरिष्ठ अधिकारी के पद पर हैं।

केवल दो कंपनियों में शीर्ष प्रबंधन भूमिकाओं में 3 महिलाएं थीं और केवल 9 कंपनियों में शीर्ष प्रबंधन भूमिकाओं में 2 महिलाएं थीं। Photo by Luke Southern / Unsplash

अध्ययन से यह भी मालूम पड़ता है कि लैंगिक असमानता उनके पैकेज पर भी दिखाई देती हैं। महिलाओं को कंपनी में समान भूमिकाओं के लिए पुरुषों की तुलना में 17 फीसदी कम भुगतान किया जाता है। एसोसिएट प्रोफेसर प्रोमिला अग्रवाल द्वारा 'द ग्लास सीलिंग: रिसर्च रिपोर्ट ऑन लीडरशिप जेंडर बैलेंस इन एनएसई 200 कंपनियों' नाम से किए गए इस अध्ययन को पेप्सिको की पूर्व चेयरपर्सन इंद्रा नूयी और ब्रिक्स देशों के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व प्रमुख केवी कामथ की उपस्थिति में लॉन्च किया गया था।