'...जे पीड़ परायी जाणे रे' बापू के इस दर्शन से जुड़ पाएंगे भारतवंशी युवा

युवाओं को इस पाठ्यक्रम के तहत शांति, सत्य और अहिंसा की सीख से जोड़ा जाएगा जिस पाठ्यक्रम 7 से 28 मई तक हर शनिवार को कक्षाएं ली जाएंगी। स्टूडेंट्स सिस्को-वेबएक्स प्लेटफॉर्म के जरिए यूरोपीय समयानुसार दोपहर 12 से 1 बजे कक्षा से जुड़ पाएंगे।

'...जे पीड़ परायी जाणे रे' बापू के इस दर्शन से जुड़ पाएंगे भारतवंशी युवा
अहिंसा के पुजारी बापू के विचार को पूरी दुनिया सम्मान से देखती है

'वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड़ परायी जाणे रे,पर दु:खे उपकार करे तोये मन अभिमान ना आणे रे ...' यह भजन मोहनदास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी की दैनिक पूजा का अभिन्न हिस्सा था। 15वीं शताब्दी में आदि कवि नरसिंह मेहता द्वारा मूल रूप से गुजराती में लिखे गए इस भजन में बापू की गहरी आस्था उनके दर्शन को स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि आमजन की सेवा करना, उनकी पीड़ा को समझना, उनकी मदद करना, लेकिन मन में अभिमान न लाना। आज बापू के इसी दर्शन को प्रवासी भारतीयों और विदेशी नागरिकों तक पहुंचाने का बीड़ा छह देशों के भारतीय दूतावासों ने उठाया है।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के साथ मिलकर भारतीय मिशन, प्रवासी भारतीयों और विदेशी नागरिकों को महात्मा गांधी के दर्शन पर एक ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स कराने जा रहा है। यह कोर्स केवल अमेरिका, कनाडा, कोलंबिया, मेक्सिको, पेरु और जमैका के नागरिकों और वहां रहे रहे भारतीय मूल के लोगों के लिए उपलब्ध है।

गांधी के दर्शन पर करें ऑनलाइन कोर्स।

इसे ग्लोबल परसुट ऑफ पीस, ट्रूथ एंड नॉन-वायलेंस नाम दिया गया है जिसकी शुरुआत 7 मई से हो रही है। कनाडा में मौजूद भारत के महावाणिज्य दूतावास ने इस बारे में बताया, 'भारत की आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में गांधीवादी डॉ. शोभना राधाकृष्णन द्वारा गांधी जी के दर्शनशास्त्र पर ऑनलाइन कक्षाएं ली जाएंगी। यह पाठ्यक्रम गांधीजी के जीवन, उनके दर्शन और उनकी विरासत पर केंद्रित होगा। इसके अलावा गांधीजी के विचार को भी पढ़ाया जाएगा ताकि स्वराज, स्वदेशी, सत्याग्रह, आध्यात्म, और संरक्षण (ट्रस्टिशिप) की अवधारणा को समझा सके जिसका पालन उन्होंने अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन दोनों में किया था।'

बापू के दर्शन ने कइयों को राह दिखाई है।

उधर, पाठ्यक्रम के उद्देश्य के बारे में कनाडा में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूतावास ने बताया, ' इस पाठ्यक्रम के जरिए हमारा उद्देश्य प्रवासी भारतीयों और विदेशी नागरिकों में भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ ही गांधी जी द्वारा दिए गए योगदान की समझ बढ़ाना है।'

क्या है पूरा पाठ्यक्रम, कैसे जुड़ें ?

युवाओं को इस पाठ्यक्रम के तहत शांति, सत्य और अहिंसा की सीख से जोड़ा जाएगा । इसकी शुरुआत 7 मई को हो रही है और 28 मई तक हर शनिवार को कक्षाएं ली जाएंगी। स्टूडेंट्स सिस्को-वेबएक्स प्लेटफॉर्म के जरिए यूरोपीय समयानुसार दोपहर 12 से 1 बजे कक्षा से जुड़ पाएंगे। पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद स्टूडेंट्स को भारतीय महावाणिज्य दूतावास और डॉ.शोभना राधाकृष्णन द्वारा प्रमाणित सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

इस पाठ्यक्रम में रुचि लेने वाले युवा टोरंटो स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर करा  सकते हैं। यह ध्यान रहे कि इसमें केवल 30 स्टूडेंट्स ही हिस्सा ले पाएंगे इसलिए रजिस्ट्रेशन में देरी से आप यह मौका गंवा सकते हैं।