न्यूजीलैंड लौटना चाहते हैं प्रवासी भारतीय, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

न्यूजीलैंड से भारत आए प्रवासी कई कारणों से अपने मूल देश में फंसे हुए हैं। कोई माता-पिता से मिलने आए थे तो कोई विवाह समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। यहां तक कि कुछ लोग अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए आए थे।

न्यूजीलैंड लौटना चाहते हैं प्रवासी भारतीय, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

कोरोना वायरस के कारण वैश्विक यात्रा पर प्रतिबंध की वजह से न्यूजीलैंड में काम करने वाले सैकड़ों प्रवासी भारतीय पिछले डेढ़-दो साल से भारत में फंसे हुए हैं। अब जबकि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं और कई देशों ने कुछ जरूरी एहतियात के साथ अपनी देश की सीमाएं खोल दी हैं तो भारत में फंसे प्रवासी भी अब अपने काम पर लौटना चाहते हैं लेकिन न्यूजीलैंड सरकार ने अब तक इस बारे में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है।

न्यूजीलैंड में काम करने वाले सैकड़ों प्रवासी भारतीयों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया।

इस दुविधा के बीच सैकड़ों प्रवासी भारतीयों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया जिससे न्यूजीलैंड और भारत की सरकार का ध्यान उनकी तरफ आकृष्ट हो और उनकी समस्याओं का समाधान किया जा सके।

न्यूजीलैंड से भारत आए प्रवासी कई कारणों से अपने मूल देश में फंसे हुए हैं। कोई माता-पिता से मिलने आए थे तो कोई विवाह समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। यहां तक कि कुछ लोग अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए आए थे। लेकिन उसके बाद पूरी दुनिया में कोविड-19 का प्रसार हो गया और तमाम देशों ने अपने देश की सीमाएं बंद कर दी जिससे ये लोग अब तक भारत में ही फंसे हैं।

न्यूजीलैंड से भारत आए प्रवासी कई कारणों से अपने मूल देश में फंसे हुए हैं। 

भारत में फंसे कुछ प्रवासी ऐसे भी हैं जिनका पति न्यूजीलैंड है और पत्नी भारत में हैं। इसी तरह किसी की पत्नी न्यूजीलैंड में है तो पति भारत में हैं। कई लोगों का पूरा परिवार न्यूजीलैंड में है और वे रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में हिस्सा लेने आए थे और वे यहीं फंस गए। इस तरह ये लोग काफी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने वाले कई छात्र भी भारत में फंसे हुए हैं। 

धरना प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए एक युवक ने कहा कि हम में से बहुत से लोग न्यूजीलैंड में नौकरी कर रहे थे लेकिन अब हम बेरोजगार हो गए हैं क्योंकि उसकी जगह अब किसी और को रख लिया गया है। उसने कहा कि मार्च 2020 से करीब 600-700 अस्थायी कार्य वीजा वाले लोगों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है।