ऑस्ट्रेलिया में चीन व न्यूजीलैंड के नागरिकों से आगे निकले भारतीय, ये है वजह

साल 2016 में की गई जनगणना में ऑस्ट्रेलिया के भीतर भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या 2,17,963 थी जो अब 6,73,352 हो गई है। यह पिछले पांच वर्षों में 47.86 फीसदी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार साल 2016 की तुलना में पंजाबी भाषा बोलने वालों की संख्या में 80 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है।

ऑस्ट्रेलिया में चीन व न्यूजीलैंड के नागरिकों से आगे निकले भारतीय, ये है वजह
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ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो ABS द्वारा जारी नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलियाई और ब्रिटिश के बाद भारतीयों की जनसंख्या तीसरे स्थान पर सबसे अधिक है। इस बार की जनगणना में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय नागरिक चीन और न्यूजीलैंड से आगे निकल गए हैं। नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि पिछली जनगणना के बाद से भारतीय मूल के व्यक्तियों की कुल जनसंख्या में लगभग 50 फीसदी की वृद्धि हुई है।

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2021 की जनगणना में पाया गया कि लगभग आधे ऑस्ट्रेलियाई लोगों के माता-पिता विदेशों में पैदा हुए हैं। Photo by Christopher Campbell / Unsplash

साल 2016 में की गई जनगणना में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या 2,17,963 थी जो अब 6,73,352 हो गई है। यह पिछले पांच वर्षों में 47.86 फीसदी अधिक है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया में अंग्रेजी के बाद सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली भाषाओं में मंदारिन (2.7 फीसदी), अरबी (1.4 फीसदी), वियतनामी (1.3 फीसदी), कैंटोनीज (1.2 फीसदी) और पंजाबी (0.9 फीसदी) बोली जाती है।

मंदारिन बोलने वालों की तादाद लगभग 685,274 है। इसके बाद अरबी भाषा का इस्तेमाल करने वाले 367,159 से अधिक हैं। वहीं पंजाबी की बात करें तो 2021 की जनगणना में 239,033 से अधिक लोग घर पर पंजाबी का उपयोग करते हैं। आंकड़ों के अनुसार साल 2016 की तुलना में पंजाबी भाषा बोलने वालों की संख्या में 80 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है।

2021 की जनगणना में पाया गया कि लगभग आधे ऑस्ट्रेलियाई लोगों के माता-पिता विदेशों में पैदा हुए हैं। जनगणना से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया ने 2017 से ऑस्ट्रेलिया में दस लाख से अधिक 10,20,007 लोगों का स्वागत किया है। 2021 की जनगणना के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में बसे लोगों के शीर्ष पांच पूर्वजों में 33 फीसदी ब्रिटिश, 29.9 फीसदी ऑस्ट्रेलियाई, 9.5 फीसदी आयरिश, 8.6 फीसदी स्कॉटिश और 5.5 फीसदी चीनी थे। वहीं शीर्ष 5 धर्मों को मानने वालों की बात की जाए तो उनमें किसी भी धर्म को न मानने वालों की संख्या 38.9 फीसदी है। वहीं कैथोलिक (20 फीसदी), एंग्लिकन (9.8 फीसदी), इस्लाम (3.2 फीसदी) और हिंदू धर्म (2.7 फीसदी) है।