अमेरिका में जाकर बसे भारतवंशी पत्नियों का परित्याग करने में सबसे आगे, दूसरे पर यूएई

विदेश मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में 47 देशों में रिपोर्ट किए गए वैवाहिक विवादों की सूची दी हैं। विदेशों में भारतीय मिशनों के भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) खाते से ऐसे मामलों के लिए लगभग 64 लाख रुपये खर्च किए चुके हैं।

अमेरिका में जाकर बसे भारतवंशी पत्नियों का परित्याग करने में  सबसे आगे, दूसरे पर यूएई
Photo by Jayesh Jalodara / Unsplash

विदेश जाकर अपनी पत्नी या पति को भूल जाना या त्याग देने की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कई मामले ऐसे भी हैं जिनमें महिलाएं शादी के बाद विदेश जाने का मौका पाकर अपने पतियों को भारत में छोड़ देती हैं और नई जमीं पर नया जीवन शुरू कर देती हैं। ऐसे ही कई मसले पुरुषों के भी हैं। एक जानकारी के अनुसार अमेरिका में रह रहे एनआरआई अपनी पत्नियों के परित्याग या कहें कि भूलने में शीर्ष पर हैं।

इस मसले पर बीते दिनों केरल के आरटीआई ​एक्टिविस्ट गोविंदन नंपूथिरी ने विदेश मंत्रालय से इसी मसले पर कुछ जानकारी हासिल की है जिसके मुताबिक भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि पिछले सात वर्षों में भारत सरकार को भारतीय दुल्हनों को उनके एनआरआई पतियों द्वारा परित्यक्त की 2,156 शिकायतें मिली हैं। इनमें सबसे अधिक मामले 615 मामले अमेरिका में जाकर बसे भारतीयों के हैं। इसके बाद 586 मामले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और 237 मामले सिंगापुर से सामने आए हैं। सरकार को सऊदी अरब से 119, कुवैत से 111, यूनाइटेड किंगडम (यूके) से 104, ऑस्ट्रेलिया से 102 और कनाडा से कुल 92 मामले प्राप्त हुए हैं। गोविंदन नंपूथिरी द्वारा दायर की गई आरटीआई पर सरकार ने यह जानकारी दी है।