'लेखिका' मां ने अमेरिका में बच्चे की परवरिश पाने के लिए लड़ी लंबी लड़ाई

अदालती लड़ाई शुरू करने के 10 साल बाद ओहरी को अपने बेटे की पूरी कस्टडी मिली। ओहरी ने फैसला सुना वह कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गईं। उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन वह केस जीत चुकी थीं। इतने लंबे वक्त के बाद उन्हें न्याय मिल गया था।

'लेखिका' मां ने अमेरिका में बच्चे की परवरिश पाने के लिए लड़ी लंबी लड़ाई

अमेरिका की मशहूर रेडियो हस्ती और व्यवसायी शीतल ओहरी ने अपने बेटे की कानूनी हिरासत हासिल करने में लगाए अपने 10 वर्ष के लंबे संघर्ष को 'कस्टोडियल बैटल: क्रॉनिकल्स ऑफ एन इमिग्रेंट मदर हू वाज डिलेड जस्टिस इन फैमिली लॉ ड्यू टू इमिग्रेशन स्टेटस' नाम की पुस्तक में संजो कर एक काल्पनिक रूप दिया है।

शीतल ओहरी ने अपनी किताब में ऋतिका नाम की एक महिला की कहानी को दर्शाया है, जो एक युवा भारतीय है और एक अमेरिकी नागरिक सुमित से शादी करती है। काफी कम वक्त में गर्भवती हुई ऋतिका को सुमित छुट्टियों के दौरान भारत लाता है और भारत में ही छोड़कर बेटे रोहन को लेकर वापस अमेरिका चला जाता है। सुमित ने शादी के बाद कभी भी ऋतिका के लिए स्पाउस वीजा के लिए आवेदन नहीं किया होता। ऐसे में ऋतिका अपने बेटे की कस्टडी लेने के लिए जंग लड़नी शुरू करती है।

ओहरी ने खुद एक दशक तक अपने बेटे की कस्टडी लेने के लिए प्रयास किए थे। आज उनका बेटा ​किशोर है। हालांकि नाबालिग होने की वजह से ओहरी ने अपने बेटे का नाम नहीं बताया है। उन्होंने इंडियन स्टार से बातचीत में कहा कि मैंने 10 साल तक संघर्ष किया, क्योंकि मेरे और मेरे बेटे के साथ जो हो रहा था वह अमानवीय था। मैं ऐसी बहुत सी महिलाओं को जानती हूं जिन्हें भारत में छोड़ दिया गया है और उनके बच्चे अमेरिका में हैं।

अदालती लड़ाई शुरू करने के 10 साल बाद ओहरी को अपने बेटे की पूरी कस्टडी मिली। जिस दिन उन्हें कस्टडी मिली उस दिन वह आम सुनवाई को ध्यान में रखते हुए अदालत पहुंचीं। उनके पूर्व पति को बेटे को अदालत में लाने के लिए कहा गया था। जैसे ही ओहरी ने फैसला सुना वह कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गईं। उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन वह केस जीत चुकी थीं। इतने लंबे वक्त के बाद उन्हें न्याय मिल गया था।