भावुक हुए प्रेम भंडारी, कश्मीर के लड़के को मुफ्त कृत्रिम अंग देने का वादा

परवेज ने छोटी उम्र में ही एक अग्निकांड में अपना बायां पैर खो दिया था। वह वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के नौगाम के एक सरकारी स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रहा है। उसके पिता गुलाम अहमद हाजम ने बताया कि उनकी पत्नी दिल की मरीज है। वह बारामूला में थे, जब परवेज के साथ यह घटना हुई।

भावुक हुए प्रेम भंडारी, कश्मीर के लड़के को मुफ्त कृत्रिम अंग देने का वादा

भारत के जम्मू एवं कश्मीर के रहने वाले 14 वर्षीय परवेज का एक पैर नहीं है। एक समाचार एजेंसी के जरिए जब इस बात की जानकारी भारतीय अमेरिकी और जयपुर फुट यूएसए के अध्यक्ष प्रेम भंडारी को मिली तो उन्होंने बच्चे के लिए मुफ्त पैर बनाने का वादा कर दिया। बच्चे की वीडियो को देखकर भावुक हुए प्रेम भंडारी ने कहा कि वह बच्चे को एक टांग पर स्कूल जाते देख भावुक होने के साथ साथ उससे प्रभावित भी हुए हैं। यह बच्चा गांव की खराब सड़कों के बावजूद रोजाना स्कूल जाता है। जयपुर फुट यूएसए के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने बताया कि परवेज को जल्द से जल्द कृत्रिम अंग बनाकर दिया जाएगा। बता दें कि जयपुर फुट विशेष रूप से विकलांग लोगों के लिए कृत्रिम अंग बनाने का काम करता है।

भंडारी ने बताया कि इस मामले के सामने आने से पहले बिहार की एक बच्ची की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। सोशल मीडिया की वजह से विकलांग बच्चों की जानकारी दुनिया के सामने आई जबकि इस काम को करने के लिए राज्य सरकारों को आगे आना चाहिए और राज्य के छात्र और छात्राओं की एक सूची तैयार करनी चाहिए ताकि आगे चलकर राज्य में ऐसा कोई भी मजबूर बच्चा न हो।

भंडारी ने बताया कि हाल ही में भारत सरकार के सौजन्य से भगवान महावीर विकलांग सहायता समीति ने बीते दिनों सुडान में एक शिविर लगाया था जिससे न सिर्फ विदेश में भारत की साख बन रही है बल्कि मोदी सरकार के जरिए विश्वभर में विकलांगों की मदद भी हो रही है। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के संस्थापक डीआर मेहता पूरे जोश के सा​थ इस नेक काम में जुटे हुए हैं। भारत सरकार की मदद से अभी तक 7500 विकलांगों की मदद की जा चुकी है।

जयपुर फुट यूएसए के अध्यक्ष प्रेम भंडारी 

दरअसल परवेज ने छोटी उम्र में ही एक अग्निकांड में अपना बायां पैर खो दिया था। वह वर्तमान में जम्मू- कश्मीर के नौगाम के एक सरकारी स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रहा है और बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता है। परवेज बताते हैं कि मैं एक पैर पर संतुलन बनाकर रोजाना लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय करता हूं। सड़कें अच्छी नहीं हैं। अगर मुझे एक कृत्रिम अंग मिल जाए तो मैं चल सकता हूं। मेरा अपने जीवन में कुछ हासिल करने का सपना है।

वहीं परवेज ने समाचार एजेंसी को बताया कि मेरे स्कूल तक पहुंचने का रास्ता क्षतिग्रस्त है। स्कूल पहुंचने के बाद मुझे बहुत पसीना आता है, क्योंकि मेरे लिए चलना मुश्किल है। मैं स्कूल पहुंचने के बाद प्रार्थना करता हूं। मुझे क्रिकेट, वॉलीबॉल और कबड्डी पसंद है। मुझे यह देखकर दुख होता है कि मेरे दोस्त ठीक से चल सकते हैं। हालांकि मुझे शक्ति देने के लिए मैं भगवान को धन्यवाद देता हूं। परवेज ने कहा कि आग लगने के बाद उसके पैर को काटने के लिए उनके पिता को काफी कीमत चुकानी पड़ी थी।

परवेज के पिता गुलाम अहमद हाजम ने बताया कि उनकी पत्नी दिल की मरीज है। वह बारामूला में थे, जब परवेज के साथ यह घटना हुई। उनके पास इलाज के लिए 3 लाख रुपये नहीं थे। ऐसे में परवेज के लिए उन्हें अपनी संपत्ति बेचनी पड़ी। हाजम ने सरकार से अपने बेटे की मदद करने की भी अपील की है।