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मेरा पासपोर्ट भले ही पाकिस्तान का है, मेरी जड़ें हिंदुस्तान की हैं, किसलिए चर्चा में है यह डायलॉग?

भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द दिखाने पर बहुत से लोग सोशल मीडिया पर इस सीरीज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर नाखुश भी हैं। एपिसोड में कमला की नानी कहती हैं कि मेरा पासपोर्ट भले ही पाकिस्तान का हो, लेकिन मेरी जड़ें हिंदुस्तान की हैं।

नई वेबसीरीज 'मिस मार्वल' इन दिनों चर्चा में है। मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की ये सीरीज 16 साल की एक लड़की कमला खान पर आधारित है, जो न्यू जर्सी में रहती है लेकिन उसकी जड़ें पाकिस्तान से जुड़ी हैं। सीरीज के चौथे एपिसोड में कमला पाकिस्तान में कराची जाती है, जहां उसे अपने पुरखों के बारे में काफी कुछ पता चलता है। वह अपनी नानी से भारत-पाकिस्तान के विभाजन पर भी बात करती है।

इस वेबसीरीज को लेकर लोगों की जबर्दस्त प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। 

एपिसोड में कमला की नानी कहती हैं कि मेरा पासपोर्ट भले ही पाकिस्तान का हो, लेकिन मेरी जड़ें हिंदुस्तान की हैं। और इनके बीच में एक सीमा है, जो खून और दर्द से भरी है। लोग अपनी पहचान का दावा उस विचार के आधार पर कर रहे हैं, जो कुछ अंग्रेज देश से भागते समय दे गए थे।

भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द दिखाने पर बहुत से लोग सोशल मीडिया पर इस सीरीज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर नाखुश भी हैं। एक यूजर का कहना था कि कमला की नानी ने भारत के विभाजन का बखूबी बयान किया है। यह दुनिया के इतिहास की केवल एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना नहीं है। उसकी भयावह यादें इतने बरस बीत जाने के बाद आज भी लाखों दक्षिण एशियाई लोगों को आतंकित करती हैं।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि एक दक्षिण एशियाई के रूप में इस भयावहता को देखना भी बहुत मुश्किल था, जिससे हमारे दादा-दादी 75 साल पहले गुजरे थे। मार्वल ने भारत के विभाजन को वास्तविक रूप से चित्रित करते हुए बहुत अच्छा काम किया है। एक यूजर ने कहा कि मेरे स्कूल की क्लास में इतिहास को इतने अच्छे से नहीं पढ़ाया गया, जितना मिस मार्वल ने एपिसोड 5 में बता दिया। विभाजन और ब्रिटिश साम्राज्य के इतिहास को सामने लाने का ये अच्छा प्रयास है।

हालांकि एक अन्य यूजर का कहना था कि विभाजन के बारे में मिस मार्वल के उस बालकनी सीन की लोगों को तारीफ नहीं करनी चाहिए। एक ने टिप्पणी की कि आपके लिए इस बात से इनकार करना कितना हास्यास्पद है कि ये खींची गई रेखाएं गोरे लोगों का विचार नहीं थीं।

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