कोरोना के लॉकडाउन में महारानी ने विमल को माना था हीरो, अब ब्रिटेन से निकाला क्यों जा रहा है?

दक्षिण-पूर्व लंदन के रहने वाले भारतीय मूल के विमल पंड्या को होम ऑफिस द्वारा व्यवस्थापक खामियों के बाद ब्रिटेन से जबरन निकाले जाने का सामना करना पड़ा रहा है। उन्होंने ब्रिटेन में रहने के लिए अपने मानवाधिकार आवेदन को अस्वीकार करने के खिलाफ अपील दायर की है।

कोरोना के लॉकडाउन में महारानी ने विमल को माना था हीरो, अब ब्रिटेन से निकाला क्यों जा रहा है?
41 वर्षीय पंड्या को महामारी के दौरान समुदाय में उनके काम के लिए शाही पहचान मिली थी। (फोटो: विमल)

दक्षिण-पूर्व लंदन के रहने वाले भारतीय मूल के विमल पंड्या को होम ऑफिस द्वारा व्यवस्थापक खामियों के बाद ब्रिटेन से जबरन निकाले जाने का सामना करना पड़ा रहा है। उन्होंने ब्रिटेन में रहने के लिए अपने मानवाधिकार आवेदन को अस्वीकार करने के खिलाफ अपील दायर की है।

दरअसल पांड्या जिस कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे उस कॉलेज से पांड्या का लाइसेंस समाप्त हो गया था, जो उनके वीजा का प्रायोजित करता था। इसके चलते पांड्या को दस्तावेजों में कमी के चलते देश में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसे में किसी टियर-4 कॉलेज में दोबारा दाखिला लेना ही विमल के लिए पास एकमात्र विकल्प था लेकिन एयरपोर्ट पर विमल के दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए।

इंडियन स्टार ने विमल पंड्या के साथ खास बातचीत की। पांड्या ने बताया कि उनके मानवाधिकार आवेदन की जनवरी 2022 में अंतिम अपील को भी खारिज कर दिया गया था। हालांकि पांड्या को दोबारा अपनी बात रखने का एक और मौका दिया गया। इसके बाद अब उन्हें पिछले महीने ही अंतिम बार होम ऑफिस के फैसले के खिलाफ अपील करने के बारे में सूचित किया गया है।

2011 में छात्र वीजा पर यूके पहुंचने के बाद के पांड्या का साल 2015 में कॉलेज से लाइसेंस समाप्त हो गया था। यानी वह 2015 से बिना अनुमति के यूके में रह रहे हैं। हालांकि वह रोदरहिथे में स्थानीय समुदाय के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। महामारी में दर्जनों परिवारों की मदद करने के लिए उन्हें महारानी की ओर से धन्यवाद पत्र भी मिला है।

पंड्या ने बताया कि वह अभी तक इस लंबी और महंगी कानूनी प्रक्रिया से गुजरते हुए पहले ही लगभग 40,000 पाउंड से अधिक खर्च कर चुके हैं।

पंड्या ने बताया कि वह अभी तक इस लंबी और महंगी कानूनी प्रक्रिया से गुजरते हुए पहले ही लगभग 40,000 पाउंड यानी लगभग 40 लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं। अपील की प्रक्रिया दस महीने तक चल सकती है लेकिन विमल को अब अपने और अपने माता-पिता के लिए चिंता हो रही है। वर्तमान में रहने और खाने पीने के लिए वह असमर्थ हो चुके हैं। दरअसल बिना दस्तावेजीकरण के वह कहीं काम भी हासिल नहीं कर सकते।

41 वर्षीय पंड्या ने बताया कि महामारी के दौरान उन्हें अपने क्षेत्र काम के लिए शाही पहचान मिली थी। पहले लॉकडाउन के दौरान सेल्फ आइसोलेट हुए लोगों को पंड्या ने कई तरीकों से मदद की थी। उनके समर्पित भाव को देखते हुए उनकी स्थानीय निवासियों ने प्रशंसा भी की थी। इतना ही नहीं ग्रेटर लंदन के लॉर्ड-लेफ्टिनेंट केनेथ ओलिसा की ओर से उन्हें सामाजिक कार्यों के लिए पिछले साल 12 फरवरी के दिन एक ​पत्र भी मिला था जिसे उनके असाधारण प्रयासों के लिए धन्यवाद देने के लिए लिखा गया था।

उन्होंने इंडियन स्टार को बताया कि 2011 में एक छात्र के रूप में यूके पहुंचने के बाद मैंने सबसे पहले अपनी आव्रजन स्थिति को नियमित करने और शिक्षा पूरी करने के लिए हजारों पाउंड खर्च कर दिए जिसके बाद उनके पास ज्यादा रकम नहीं बची और उन्होंने शिक्षा के साथ काम भी करना शुरू किया।

बता दें कि स्थानीय निवासियों ने पांड्या के समर्थन में 26 मार्च के दिन लंदन के रोदरहिथे से मार्च किया और मांग की कि उन्हें रहने की अनुमति दी जाए। दरअसल इसी दिन पांड्या को पिछले साल किए गए सेवाभाव के लिए सम्मानित किया गया था। निर्वासन की लड़ाई लड़ रहे विमल पांड्या के समर्थन में 1,20,000 से अधिक लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। महामारी के दौरान लंदन के एक दुकानदार के रूप में उनके काम के लिए महारानी द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने के बाद बरमोंडे और ओल्ड साउथवार्क के सांसद नील कोयले भी विमल से मिलने आए थे।