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अंग्रेजी हुकूमत में उन्हीं के वास्तुकारों से बनवा लिया बकिंघम पैलेस से बड़ा महल

भारत के सबसे बड़े महल लक्ष्मी विलास पैलेस को दुनिया के आलीशान महलों में गिना जाता है। महाराजा सैयाजीराव की इस 130 साल पुरानी धरोहर को तैयार करने में ही 10 साल लग गए थे। महल का दूसरा मुख्य आकर्षण यहां दीवारों पर टंगी पेंटिंग भी है, जिन्हें प्रसिद्ध चित्रकार राज रवि वर्मा ने बनाया है।

लक्ष्मी विलास महल को ब्रिटिश वास्तुकार ने डिजाइन किया था

आपसे कोई पूछता है कि 'ताज महल' कहां हैं? आप एक पल गंवाए बिना कह देते हैं भारत के शहर आगरा में, लेकिन अगर आपसे यह पूछा जाए कि 'लक्ष्मी विलास पैलेस' कहां है तो शायद आपको गूगल करना पड़ जाए। जब आप इस महल की भव्यता और उसके वास्तुकला के बारे में महज पढ़ ही लेंगे तो आप अपनी अनभिज्ञता पर शायद शर्मिंदा हो जाएं। भारत में ऐसे कई ऐतिहासिक इमारते हैं जिनके बारे में न ज्यादा बात की गई और न उस पर लिखा गया, उन्हीं में से एक है बड़ौदा का लक्ष्मी विलास पैलेस। यह बड़ौदा रियासत का महल है जिसके सामने ताजमहल ही नहीं बल्कि देश के कई धरोहर स्थलों की परिधि छोटी पड़ जाती है।

भव्यता में ब्रिटेन की महारानी का महल भी पीछे

लक्ष्मी विलास पैलेस, गुजरात के बड़ौदा में कोई 500 एकड़ के दायरे में फैला हुआ इंडो-सारासेनिक शैली की एक शानदार इमारत है। इसकी भव्यता का अंदाजा इस बात लगा सकते हैं कि यह ब्रिटेन के शाही आवास बकिंघम पैलेस से थोड़ा बहुत नहीं बल्कि चार गुणा बड़ा है। महल के निर्माण का श्रेय मराठा शासक महाराजा सैयाजीराव गायकवाड़ तृतीय को जाता है जिसके लिए उन्होंने ब्रिटिश वास्तुकार चार्ल्स मेंट को नियुक्त किया था। 170 कमरे वाले इस महल की वास्तकला की विशेषता मेहराब, गुंबद, तोरण, झरोखे, पच्चीकारी और जालियां हैं तो बड़े-बड़े झूमर और अनेकों कलाकृतियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं।

महल का दूसरा मुख्य आकर्षण यहां दीवारों पर टंगी पेंटिंग भी है, जिन्हें प्रसिद्ध चित्रकार राज रवि वर्मा ने बनाया है। बताया जाता है कि बड़ौदा रियासत का कायाकल्प करने वाले मराठा शासक महाराजा सैयाजीराव ने रवि वर्मा को खासकर महल की सजावट के लिए नियुक्त किया था। रवि वर्मा ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और निकल पड़े देश के भ्रमण के लिए। इस भ्रमण के दौरान उन्होंने जो भी अनुभव किया उस आधार पर महल के लिए पेंटिंग तैयार की। महल के बाहरी दीवारों पर भी रवि वर्मा की पेंटिंग देखी जा सकती है।

130 साल पुरानी धरोहर, बनने में लग गए थे 10 साल
भारत के सबसे बड़े महल लक्ष्मी विलास पैलेस को दुनिया के आलीशान महलों में गिना जाता है। महाराजा सैयाजीराव की इस 130 साल पुरानी धरोहर को तैयार करने में ही 10 साल लग गए थे। 1880 में जब अंग्रेज वास्तुकार चार्ल्स मेंट ने महल का डिजाइन तैयार कर सैयाजीराव को सौंपा तो उन्होंने उस पर हामी भरते हुए निर्माण की इजाजत दे दी, लेकिन इसमें वास्तुकार मेंट की बीच में ही मौत हो गई। मेंट की मौत के बाद बड़ौदा रियाशत के सामने यह सवाल था कि आखिर इस महल को पूरा कैसे किया जाए, तब एक और अंग्रेज वास्तुकार रॉबर्ट फेलोस चिशोल्म को इसकी जिम्मेदारी दी गई। चिशोल्म ने मेंट के छोड़े हुए काम को आगे बढ़ाते हुए 1890 में  इसे पूरा किया।

दस साल का वक्त केवल महल बनाने में ही नहीं लगा बल्कि इसके उद्यान को तैयार करने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसकी वजह यह थी कि सैयाजीराव अपने महल का हर कोना बेहद भव्य देखना चाहते थे। उन्होंने उद्यान बनाने के लिए भी वनस्पति विशेषज्ञ को नियुक्त किया। लक्ष्मी विलास महल के उद्यान को अंग्रेज वनस्पति वैज्ञानिक सर विलियम्स गोल्डिंग की निगरानी में तैयार किया गया। सर विलियम्स गोल्डिंग वही हैं, जिन्हें लंदन के बॉटनिकल गार्डन को तैयार करने के लिए जाना जाता है। यह तो महल को बनाने के पीछे की कहानी हो गई लेकिन एक आम पर्यटक होने के नाते आपको क्या जानना चाहिए, नीचे पढ़िए।

महल में क्या-क्या है देखने लायक

500 एकड़ में केवल राजा-रानी का महल ही नहीं है बल्कि मोती बाग महल, महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय,  मोती बाग क्रिकेट स्टेडियम, बड़ौदा क्रिकेट असोसिएशन का दफ्तर, टेनिस कोर्ट और एक बैडमिंटन कोर्ट भी मौजूद है। आपने नवलखी बावड़ी के बारे में तो सुना होगा, यह भी इस महल की परिधि में ही है और इसकी एक खासियत यह है कि इसकी खिड़की प्राचीन जल संसाधन प्रणाली की तरफ खुलती है जिसे बड़ौदा रियासत ने गुजरात को सूखे की मार से बचाने के लिए बनवाया था।

महल की भव्यता की कहानी पढ़कर और तस्वीरें देखकर ऐसा तो नहीं लग रहा कि यहां आम लोगों का प्रवेश वर्जित होगा। नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है। यहां भले आज भी बड़ौदा का शाही परिवार रहता हो लेकिन यह पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार रहता है।

पहुंचना बहुत आसान, लेकिन रखें यह ख्याल

भारत दौरे पर गुजरात में कुछ दिन गुजारने की इच्छा हो तो लक्ष्मी विलास पैलेस देखने जरूर जाएं। यहां से वैसे तो बड़ौदा हवाईअड्डा सबसे नजदीक है लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए आपको अहमदाबाद हवाईअड्डे उतरना होगा। वहां उतरकर आप बड़ौदा के लिए घरेलू उड़ान ले सकते हैं। वहीं, अगर आप राजधानी दिल्ली या मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का रास्ता चुनते हैं तो वहां से भी घरेलू उड़ान बड़ौदा के लिए मिल जाएगी। आप यदि भारत भ्रमण पर रेल सफर की इच्छा रखते हैं तो दिल्ली या मुंबई दोनों में से किसी भी रास्ते को चुन लीजिए। दिल्ली से राजधानी और मुंबई से शताब्दी लेकर आप बड़ौदा का सुहाना सफर पूरा कर सकते हैं।

महल जाते वक्त समयसारणी पता होना जरूरी है। महल को सुबह 9.30 से शाम 5 बजे तक आम पर्यटकों के लिए खोला जाता है लेकिन ध्यान रहे कि दोपहर 1 से 1.30 बजे के बीच महल की ओर न जाएं, उस वक्त महल में घुसने की इजाजत नहीं दी जाती और सोमवार को भी महल के दरवाजे पर्यटकों के लिए बंद रहते हैं।

फोटो साभार : सभी तस्वीरें गुजरात टूरिज्म की वेबसाइट से ली गई हैं।

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