क्या दोबारा सांसद बन पाएंगे केन्या में यह भारतीय मूल के डॉक्टर साहब?

केन्या में 9 अगस्त के आम चुनावों में मतदाता राष्ट्रपति, नेशनल असेंबली और सीनेट के सदस्यों, काउंटी गवर्नरों और 47 काउंटी विधानसभाओं के सदस्यों का चुनाव करेंगे। दरअसल केन्या का संविधान कहता है कि राष्ट्रपति चुनाव आम चुनाव के साथ ही हों।

क्या दोबारा सांसद बन पाएंगे केन्या में यह भारतीय मूल के डॉक्टर साहब?

केन्या में 9 अगस्त को आम चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों में भारतीय मूल के डॉक्टर डॉ. स्वरूप रंजन मिश्रा लगातार दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वह केन्या की केसेस संसदीय सीट पर संयोग से साल 2017 में चुनाव जीत भी चुके हैं। डॉ. मिश्रा साल 2017 में केन्या के संसदीय चुनावों में जीतने वाले पहले एशियाई बने थे। इससे केन्या की राजनीति के इतिहास में उनका नाम सदा के लिए दर्ज हो गया है।

अपने दम पर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने वाले डॉ. मिश्रा मूल रूप से भारत के राज्य ओडिशा से हैं। उन्होंने ओडिशा से एमबीबीएस किया और काफी समय पहले केन्या में ना​गरिकता ले ली थी। डॉ. मिश्रा स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। मिश्रा ने केन्या में दशकों तक न सिर्फ अभ्यास किया बल्कि उन्होंने चार अस्पताल की स्थापना भी की और कई प्राइमरी स्कूलों को हाई स्कूल में तब्दील करवाया।

​डॉ. मिश्रा के प्रचार अभियान में केन्या के अलग थलग पड़े समुदाय ने विशेष भूमिका निभाई हुई है। वह केन्या के लोकप्रिय गीतों पर नृत्य करते हुए उनका प्रचार करते हैं। निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के लिए उनके योगदान से समर्थकों को लगता है कि डॉक्टर साहब दोबारा से चुनाव जीतेंगे। बता दें कि केन्या में 9 अगस्त के आम चुनावों में मतदाता राष्ट्रपति, नेशनल असेंबली और सीनेट के सदस्यों, काउंटी गवर्नरों और 47 काउंटी विधानसभाओं के सदस्यों का चुनाव करेंगे। दरअसल केन्या का संविधान कहता है कि राष्ट्रपति चुनाव आम चुनाव के साथ ही हों।

डॉ. मिश्रा ने साल 2017 में केन्याई राजनीति में छलांग लगाई थी और जुबली नाम के राजनीतिक दल से केन्याई संसद का चुनाव लड़ा था और एक केन्याई प्रतियोगी को भारी अंतर से हराकर निर्वाचित हुए थे। केन्या में भारतीय मूल के लोगों का एक जीवंत समुदाय है जिनकी वर्तमान में संख्या लगभग 80,000 है। इसमें अनुमानित 20,000 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। केन्या अफ्रीकी संघ का एक सक्रिय सदस्य है जिसके साथ भारत के लंबे समय से संबंध हैं।