झीलों, पहाड़ों से घिरी चौड़ी सड़कें, बाइक राइडर्स को लुभाता रहा है सिक्किम

आप अगर एक अच्छे बाइकर हैं तो तीन दिन में आप लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर सकते हैं। आपकी पहली यात्रा सिलिगुड़ी से गैंगटोक की होगी जिसकी दूरी 110 किलोमीटर है, दूसरी गैंगटोक से टुमिन की जिसमें आपको 42 किलोमीटर की राइड करनी होगी

झीलों, पहाड़ों से घिरी चौड़ी सड़कें, बाइक राइडर्स को लुभाता  रहा है सिक्किम
बाइक राइडर्स की पसंद बना हुआ है उत्तरी और पूर्वी सिक्किम।

प्रकृति प्रेमियों के बीच भारत का पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम अहम स्थान रखता है। झील, झरने, नदियां, पर्वत चोटियों और बौद्ध मठों से लैस यह राज्य सौंदर्य की अलग ही छटा बिखरेता है। चीन की सीमा से लगा यह राज्य प्रकृति प्रेमियों के अलावा बाइक राइडर्स के मन में भी रोमांचक पैदा कर देता है। पहाड़ियों और झीलों से घिरी चौड़ी सड़कों से होकर जब बाइक राइडर्स गुजरते हैं तो वह जीवनभर के लिए एक अद्भुत अनुभव साथ लेकर जाते हैं। अगर आप भी बाइक लवर हैं तो आपको सिक्किम का दौरा लुभा सकता है। आइए जानते हैं कि वहां जाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

बाइक राइड के तीन विकल्प और तीन अलग-अलग डेस्टिनेशन

राइडर के पास पहला विकल्प यह है कि अगर अपनी बाइक है तो या तो आप अकेले या फिर किसी को साथ बिठाकर राइड शुरू कर सकते हैं। दूसरा विकल्प, किराए की बाइक लेकर सोलो राइड करना और तीसरा विकल्प किराए की बाइक लेकर दो राइडर के साथ ट्रिप की शुरुआत करना। यात्रा के शुरुआती पॉइंट पर आपको किराए पर बाइक मिल जाएगी, जिस पर आप अकेले या फिर किसी को साथ लेकर राइड पर जा सकते हैं। सफर लंबा हो तो किसी का साथ होना जरूरी होता है इसलिए आप दो राइड के साथ निकलें। यह इसलिए भी फायदेमंद होता है अगर एक थक जाए तो दूसरा बाइक चला सकता है।

सिक्किम में बाइक राइड की शुरुआत पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी से शुरू होती है। सिलिगुड़ी की यह यात्रा खूबसूरत वादियों से गुजरते हुए सिक्किम राजधानी गैंगटोक पर आकर खत्म होती है। यात्रा के दौरान आपको अलग-अलग तरह के मौसम का सामना करना पड़ सकता है शुरुआत में आपको वातावरण में नमी का अहसास होगा, गैंगटोक आते आपको ठंड लगनी शुरू हो जाएगी। इसलिए साथ में गर्म कपड़े जरूर रखें।

सिक्किम दौरे पर आपको ऐसे बाइक लवर्स हर तरफ दिखेंगे।

अगली यात्रा के लिए आप उत्तरी सिक्किम के लाचुंग को चुनें। हालांकि यहां जाने के लिए आपको परमिट की जरूरत पड़ेगी। यह तिब्बत सीमा के करीब एक पहाड़ी गांव है, जो 19वीं सदी के बौद्ध मठ के लिए मशहूर है। यहां से गुजरते वक्त रास्ते में आपको युमथांग और के2 चोटी के भी दर्शन होंगे। आपका अगला पड़ाव लाचेन होगा जो कि दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई वाली झीलों में से एक गुरुडोंगमार झील और चोपटा घाटी के कारण पर्यटकों को लुभा रहा है। बता दें कि गुरुडोंगमार झील दुनिया यहां जाने के लिए आपको भारत-चीन सीमा की अंतिम चौकी जीरो पॉइंट से होकर गुजरना होगा जोकि अपने-आप अद्भुत अनुभव होगा।

यहां आप वापस गैंगटोक की ओर रवाना होंगे। गैंगटोक में एक रात आराम करने के बाद अगले दिन पूर्वी सिक्किम की यात्रा पर निकलें, इसके लिए पहले आपको परमिट को रिन्यू कराना होगा। आपने लंबी यात्रा के बाद आप पदमचेन गांव पहुंचते हैं जहां से फिर आप उसी जगह यानी सिलीगुड़ी पहुंचते हैं जहां से आपने अपने रोमांचक सफर की शुरुआत की थी।

झीलों और पहाड़ियों के बीच सफर का अलग ही मजा है।

आपको यह ध्यान रखना है कि इस पूरी यात्रा में तीन दिन लगेंगे जिस दौरान करीब 200 किलोमीटर बाइक राइड करनी पड़ेगी। आपकी पहली यात्रा सिलिगुड़ी से गैंगटोक की होगी जिसकी दूरी 110 किलोमीटर है, दूसरी गैंगटोक से टुमिन की, जिसमें आपको 42 किलोमीटर की राइड करनी होगी, अगली टुमिन से मंगन की यात्रा जो कि 28 किलोमीटर लंबी है। तीनों ही दिन आपको सिक्किम की खूबसूरत वादियों में घूमने, तस्वीरें खिंचवाने, स्थानीय भोजन का स्वाद चखने और वहां की संस्कृति को समझने का बेहद ही शानदार मौका मिलेगा।

इन छोटी-छोटी बातों का रखें ध्यान, सफर बनेगा सुहाना
स्वास्थ्य के लिहाज से गर्म कपड़े, आरामदेह जूते, सनग्लास, सन्सक्रीन लोशन, पानी की बोतल और बैकपैक साथ होना चाहिए। जहां तक बात सिलिगुड़ी पहुंचने की है तो कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे सबसे बढ़िया विकल्प है। आप अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ान यहां समाप्त करने के बाद बागडोगरा हवाईअड्डे के लिए उड़ान भरें, यह हवाईअड्डा सिलिगुड़ी के करीब है।

समझें सिक्किम घूमने के लिए परमिट का गणित
पर्यटन के लिहाज से सिक्किम अन्य राज्यों से अलग है। इसकी सीमा चीन, नेपाल और भूटान से लगी है इसलिए विदेशी नागरिकों को गैंगटोक सहित सिक्किम में कही भी घूमने से पहले रिस्ट्रिक्ट एरिया परमिट (RAP)की जरूरत पड़ती है। वहीं, कुछ ऐसे इलाके हैं जहां घूमने के लिए भारतीय नागरिकों को भी पहले परमिट लेना पड़ता है। सोमोगो झील, नाथुला, युमथांग घाटी, गुरुडोंगमार झील, जुलुक को संरक्षित इलाका घोषित किया गया है और इसलिए चाहे आप विदेशी नागरिक हों या भारतीय आपको इन इलाकों में घूमने के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) जारी करवाना होता है।

जैसा कि ऊपर लिखा गया है कि गैंगटोक आकर दोबारा परमिट रिन्यू करवाना पड़ेगा, ऐसा इसलिए क्योंकि एक परमिट एक इलाके के लिए किसी खास दिन तक के लिए ही वैध रहता है। उस परमिट से दूसरे इलाके में नहीं घूमा जा सकता।

तस्वीरें : सिक्किम सरकार की वेबसाइट से ली गई हैं।