जाल में फंसी 'सोने के दिल' वाली मछलियां, गरीब मछेरा बन गया करोड़पति

ये मछलियां 1.33 करोड़ रुपये में बिकीं। हर मछली को करीब 85 हजार रुपये में बेचा गया। इन मछलियों को यूपी और बिहार से आए व्यापारियों ने खरीदा है। मछलियों को प्रोसेस कर विदेशों में बेचा जाएगा।

जाल में फंसी 'सोने के दिल' वाली मछलियां, गरीब मछेरा बन गया करोड़पति

भले ही इंसान की जिंदगी कितनी भी गरीबी में क्यों न गुजर रही हो मगर किस्मत पलटते देर नहीं लगती। महाराष्ट्र के पालघर में एक मछुआरे पर किस्मत कुछ इस कदर मेहरबान हुई कि वह एक झटके में करोड़पति बन गया। पालघर के चंद्रकांत तरे अपने 7 साथियों के साथ समुद्र में मछली पकड़ने गए थे। जब इन लोगों ने समुद्र में जाल डाला, तो 'सी गोल्ड' कही जाने वाली दुर्लभ घोल मछलियां इसमें फंस गईं। मछुआरे इसे 'सोने के दिल' वाली मछली इसलिए बोलते हैं क्योंकि इसके पेट मे एक 'थैली' होती है जिसकी बहुत मांग है।

चंद्रकांत की किस्मत इतनी अच्छी थी कि उनके जाल में एक-दो नहीं पूरी 157 घोल मछलियां एक साथ फंस गईं। 

राजधानी मुम्बई से सटे जिले पालघर के इस मछुआरे की ऐसी लाटरी लगी है जिसकी उसने सपने में भी कल्पना नही की थी। चंद्रकांत की किस्मत इतनी अच्छी थी कि उनके जाल में एक-दो नहीं पूरी 157 घोल मछलियां एक साथ फंस गईं। ये मछलियां 1.33 करोड़ रुपये में बिकीं। मछलियों का ऑक्शन पालघर के मुर्बे में हुआ। चंद्रकांत के बेटे सोमनाथ ने कहा कि उन्होंने हर मछली को करीब 85 हजार रुपये में बेचा।

घोल मछली का वैज्ञानिक नाम 'Protonibea Diacanthus' है। इसे 'सी गोल्ड' भी कहा जाता है।

सोमनाथ ने बताया कि वे 7 लोगों के साथ हारबा देवी नाम की नाव से समुद्र में 20 से 25 नॉटिकल माइल अंदर वाधवान की तरफ गए थे। इसी दौरान उनके पिता के समुद्र में फैलाए जाल में 157 घोल मछलियां फंस गई। इसके साथ ही नाव पर सवार लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई, क्योंकि यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी कमाई वाली ट्रिप बन गई थी। सोमनाथ के मुताबिक घोल मछली के पेट मे एक थैली होती है जिसकी बहुत मांग है।

सर्जरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले धागे, जो अपने आप गल जाते हैं, वे भी इसी मछली से बनाए जाते हैं।